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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१४४ यह सुन कर लोरने उस योगीकी पूजाकी और उससे चन्द्रालीके प्राणदानके बदले अपना सर्वस्व देनेका वादा किया। योगीने कहा—मुझे धन दौलत का लोभ नहीं। प्राणों की बात हो बारह बरस तक तुम दोनों मेरी पास रहकर सेवा करना। लोरने तपस्वीकी बात मान ली। योगीने तत्काल नागका आह्वान किया जो स्वयं वहाँ उपस्थित हो गया। उस नागकी महिम्यासे चन्द्राली जीवित हो उठी और उसे पुनः अपना रूप मिल गया। चन्द्रालीके जीवित होते ही योगी अन्तर्ध्यान हो गये। इसी बीचमें गोहारीके राज्य महराका पता चला कि बावनबीर मारा गया। उसे यह भी पता चला कि मरते समय बावनने उन दोनोंको पति पत्नी रूपमें देखनेकी इच्छा प्रकटकी है। राजाने अपनी सेना सुसज्जितकी और वनमें पहुँचा। सेनाको देखकर लोरने मित्रकूटसे पूछा कि किसकी सेना है। जब उसने बताया कि शायद गोहारी राजा अपने भागनेका बदला लेने आया है तो लोर युद्धके लिए तैयार हो गया। मित्रकूटने कहा—ऋषि प्रभावसे विजय निश्चित है। आपकी बात तो अलग मैं सब शत्रुओंको परास्त करनेकी हिम्मत रखता हूँ। यह कहकर मित्रकूटने रथ चलाया ही था कि एक बूढ़ा ब्राह्मण लोरके पास आया और आकर बोला—गोहारीके राजाने मुझे आपके पास भेजा है और कहलाया है कि आप वापस चलकर सबकी रक्षा करें। लोरन चन्द्रालीके अनुरोधपर उसकी बात मान ली। इस तरहसे लोर पुनः गोहारी देश लौटकर राजाके मरनेके बाद वहाँका राजपाट चलाने लगा। ✕ ✕ ✕ इधर मैना अपने पतिके विरहमें सन्तप्त हो रही थी। वह धर्म कर्म और पूजा में रत रहती। उसके सतीत्वकी प्रशंसा सुनकर नरेन्द्र राजाके पुत्र छावनकुमार अधार्मिक उद्देश्यसे बनियेके वेशमें आया। अपनी कार्य सिद्धिके लिए उसने रत्ना मालिनसे सहायता मांगी। मालिन धनके लोभमें यह कार्य करनेको तैयार हो गयी। वह मालिन मैनाके पास पहुँची और बोली—मैं तुम्हारी बचपनकी धाय हूँ। मैनाने उसकी बातपर विश्वासकर उसकी आवभगतकी और उसे अपने पास रख लिया। वहाँ रहकर वह मालिन मैनाको बहकानेके लिए तरह तरहकी कथाएँ कहती और उसे विरहावस्था त्यागकर किसी प्रेमीको अपनानेको प्रेरित करती। पर मैना अपने पति प्रेममें रत थी। वह अपने सतसे टलनेको तैयार न हुई। इसी प्रसंगमें बारहमासा आता है। मालिन अनुरोधका यत्न करके छलके पथसे उसे भ्रष्ट करना चाहा किन्तु मैना अपने पथसे विचलित नहीं हुई। इस प्रसंगके समाप्त होते ही दौलत काजी कृत रचना समाप्त हो जाती है। बादकी कथा आलाओलने इस प्रकार समाप्त की है— मैनापर अपना प्रभाव न पड़ते देख मालिन सम्भवतः हताश होने लगी। जब मालका बयान समाप्त होते होत मैना बुढ़ीको पहचान जाती है और उसका मुँह काला कराकर गधेपर चढ़ाकर निकाल बाहर कराती है—