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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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२ साधन कृत मैना-सत साधन कृत मैना-सतकी रचना कब हुई इस सम्बन्धमें अभी कुछ निश्चित नहीं कहा जा सकता; पर इतना तो निश्चित है कि वह सोलहवीं शताब्दीके मध्यसे पूर्व की रचना है। यह रचना आज दो रूपोंमें उपलब्ध है। १-चतुर्भुजदास निगम कृत मधु-मालतीके कुछ पाठोंमें यह रचना स्वतन्त्र स्वरूप अन्तर्भुक्त है। इस रूपमें प्राप्त मैना-सत की सूचना माताप्रसाद गुप्तने १९५४ में अवन्तिका में दी थी। पश्चात् मधु-मालतीके दो प्रतियोंके आधारपर हरिहर निवास द्विवेदीने १९५८ में मैना-सतका एक संस्करण प्रकाशित किया है। इसके अनुसार कथा इस प्रकार है- परनापुरीके अनूपरि जातिके महाजनोंमें नाहन (नौरन) नामके एक महाजन थे। मैना उनकी रूपवती पत्नी थी। एक समय वहाँके महाजनोंने व्यापारके निमित्त परदीप जानेका निश्चय किया उनके साथ नाहन (नौरन) भी जानेको उद्यत हुआ। उसकी पत्नी मैनाने रोकनेकी चेष्टा की। नाहन (नौरन) उसे समझा बुझाकर यह आश्वासन देकर कि वह एक वर्षमें लौट आयेगा परदीप चला गया। पतिकी अनुपस्थितिमें मैना सब आमोद प्रमोद त्यागकर उदास रहने लगी। गंगापार पुरवर देशपर किसी राजाका साठिन नामक लम्पट पुत्र था। उसने एक दिन आखेट के लिए जाते समय मैनाको अपनी अट्टालिकापर बैठे देख लिया और उसपर आसक्त हो गया। उसे प्राप्त करनेके निमित्त उसने अपने मित्रसे परामर्श किया और उसके परामर्शसे रतना नामक मालिनको बुलाकर मैनाको पथभ्रष्ट करनेको कहा। मालिनने इस कार्यको पूरा करनेका बीड़ा उठाया। मालिन सारी तैयारी करके मैनाके महलमें पहुँची। उसने मैनाको अनेक उप- हार भेंट किये और कहा कि मैं तुम्हारी बचपनकी धाय हूँ। तुम्हें सिने खूब सिखाया है। तुम्हारी ममतासे आकृष्ट होकर तुम्हारे पास आयी हूँ। मैनाने उसकी बातपर विश्वास कर लिया और उसका आदर सत्कार किया। इस प्रकार विश्वास जमानेके पश्चात् मालिनने मैनासे मलिन वेशमें रहनेका कारण पूछा। मैनाने उस अपने मलिन रहनेका कारण पतिका विदेश गमन बताया जो कपटी मालिनने उसमें सहानुभूति प्रकट की और आँसू बहाये। फिर सहानुभूतिके भारमें वह प्रतिरात उस मालकी लावण्य वणन कर मैनाको उसके शृंगारका स्मरण दिलाने और उस सर्व वय विचलित करनेकी चेष्टा करने लगी।