भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 385, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 385

१६४ हो उठे। अब तक उस देहातमें उनका जोड़ देने वाला कोई न था ! अब उसे नोरिक जोड़ देने वाला मिल गया ! फिर क्या था दोनों परस्पर जोड़ करने लगे। एक दिन भितारखण्ड अपनी ससुराल सुरौली गये। वहाँ उन्होंने बड़े अभिमानसे लोगोंको कुश्ती लड़नेके लिए ललकारा। लेकिन जब राजा बामदेवके बेटे माहिलने उन्हें उठाकर फेंक दिया तो वे खिसिया गये। अपनी झप मिटानेके लिए बोले—गौरामें मेरे दो बेटे हैं उन्हीं से तुम्हारी बहन मवाधिनका विवाह करा कर तुम्हारा गर्व चूर करूँगा। माहिलने सुनकर कहा—मेरी बहनसे विवाह करने वाले किसी वीरने अभी तक जन्म नहीं लिया है। उसका छ बार जन्म हुआ और हर बार वह कुमारी ही मर गयी। उससे वही विवाह कर सकता है जो मुझे जीत ले। अब तक जो भी उससे शादी करनेकी इच्छासे आये उन्हें मारकर सुरौलीमें गाड़ दिया। तुम क्या धोथी बघारते हो ! भितारखण्डने कहा—समय आनेपर देखा जायगा। और वह अपने, घर लौट आये। जब मवाधिन सयानी हुई तो उसके पिता बामदेवने समस्त सम्बंधीको अपनी बेटीसे विवाह करनेके लिए आमन्त्रित किया। पर किसीने उसका निमन्त्रण स्वीकार नहीं किया। तब बामदेवको चिन्ता हुई। पिताको चिन्तित देख माहिलने कहा—सुना है गौरामें दो लड़के हैं उनका नाम तो मुझे मालूम नहीं। लेकिन भितारखण्ड उनसे भली भाँति परिचित हैं। आप उनके पास पत्र लिखकर नाईके हाथ भेजिये। देखिये, वे क्या कहते हैं। बेटेकी बात सुनकर बामदेवने भितारखण्डके नाम पत्र लिखा। माहिलने एक अलग पत्र लिखा जिसमें व्यंग्यके साथ लिखा—तुम्हारी बातपर हम टीका भेजते हैं। जिस शानसे तुम शादी करानेको कह गये थे, देखना है वह शान तुम कहाँ तक रखते हो। पत्र लेकर नाई भितारखण्डके पास पहुँचा। पत्र पढ़कर भितारखण्डने नाईसे कहा—कुद्रुकूबेरा घर पूछते हुए चले जाओ और उनसे कहना कि सुरौलीसे बड़े लड़केका टीका लेकर आया हूँ। तदनुसार नाइ कुद्रुकूबेरा पता पूछता हुआ उनके घर पहुँचा और अभिवादन करके अपने आनेका अभिप्राय कह सुनाया। कुद्रकूंने बामदेवकी दुष्टतासे परिचित था । अतः सुरौलीका नाम सुनते ही वह बहुत क्रुद्ध हुआ और नाईसे चले जानेको कहा। जब नोरिकको यह बात ज्ञात हुई तो उसने अपने पिताको समझाया। और किसी प्रकार टीका स्वीकार करनेको राजी किया। कुद्रकूबेने संवधका तिलक स्वीकार कर लिया और सुरौली लौटकर नाईने बामदेवको इसकी सूचना दी। कुद्रकूबेने अपने सारे सगे-सम्बन्धियोंको आमन्त्रित किया और हाथीकी बाजा

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक) · पृष्ठ 385, कुल 520 में से · BharatKosha