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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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प्राप्त कर सात सौ वीरोंकी बारात लेकर लोरिक चला। जगह-जगह रुकती हुई बारात डइनियाडिह पहुँची। वहाँ बाराती लोग रुके और खा-पीकर सो गये। लोरिकने व्यवस्था की कि पहले पहरमें बुडडूके, दूसरे पहरमें मितारजरुआ, तीसरे पहरमें सँवरू पहरा देंगे। और वह स्वयं चौथे पहरमें पहरेपर रहेगा। बामदेवको जब बारात आनेकी सूचना मिली तो उसने फुलिया डाइनको सारी बारातको मार डालनेका आदेश दिया। फुलिया डाइन कन्हिमा पहाड़पर पहुँची। उस समय बुडडूकेका पहरा था। उसके कठोर पहरेमें अपनी दाल गलती न देख वह दूसरे पहरेकी प्रतीक्षा करने लगी। बुडडूकेके पहरेके बाद मितारजरुआ और संवरूके पहरे में भी उसका कोई दाँव न लगा। अन्तमें लोरिकका पहरा आया। लोरिकको देखकर फुलिया डाइन और भी घबरायी। उसे लगा कि उसका मनोरथ सिद्ध न होगा। जब आकाशमें लाली दिखाई देने लगी तो लोरिकने सोचा कि सबेरा हुआ चाहता है अब डरकी कोई बात नहीं है और वह बारातसे कुछ दूर जाकर सो रहा। बस फुलिया डाइनको मौका मिला और उसने ऐसा जादू मारा कि सारी बारात पत्थर बन गयी। केवल वरदानके कारण केवल लोरिक बच रहा। जब लोरिककी नींद टूटी तो वह सारी बारातको पत्थर बना देखकर बहुत पछताया और विलाप करने लगा। अन्तमें निराश होकर उसने देवीका स्मरणकर अपना सर काटकर चढ़ाना चाहा। देवीने तत्काल प्रकट होकर उसका हाथ पकड़ लिया। बोली—तुम इतनेमें घबरा गये! अभी तो आगे बहुत सी कठिनाइयाँ आयेंगी। फिर लोरिकको समझा बुझाकर कहा कि सुरीहली बाजारकी चौमुहानेपर जाकर उत्तम पुकार करो। तुम्हारी पुकार सुनकर कोई न कोई सहायतार्थ फिर अवश्य आएगा। तदनुसार लोरिक सुरीहली चौमुहानेपर आकर चिल्लाने लगा। लोरिककी यह करुण पुकार सुनकर मनसागिन उसका फल लायी और करुण क्रन्दनका कारण पूछने लगी। लोरिकने उठकर सब हाल कह सुनाया। उसकी बातें सुनकर वह उसपर तरस आयी और बारातपर एक दृष्टि दौड़ायी। उस समय बन्ध्या डाइन भी वहाँ चक्कर दे रही थी। मनसागिनने हाथमें फुस लेकर मन्त्र पढ़कर मारना शुरू की। दोनों युद्ध चालू हो गया दोनों ओरसे लाठी चली। मनसागिन घायल होकर भाग खड़ी हुई। लोरिकने मनसागिनके पास कहा—आज तो मैं बहुत हारा। ऐसी नींद कभी नहीं आती थी। लोरिक बोला—हे भौंर तुम्हारी सुसकता सुनकर। और अपनी घटना कह सुनायी। तब विसाहूने कहा कि मनसागिन जिस रास्तेसे यहाँ पहुँचा है वहींपर जाओ। उसे पकड़ लाना। लोरिकने चलकर मनसागिनको पकड़ लिया तथा उनकी व्यथाको भी सुना।