चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११ उन्होंने सूचना करायी। इन्द्रने जगाकर भाग्यको बुलवाया। मान्यने उनसे मंजरी- के सम्बन्धमें पूछा। इन्द्रने अपनी पोथी खोल कर देखा लेकिन उसमें मंजरीके विवाह की बात कहीं नहीं लिखी थी। अतः उन्होंने कहा—गुरु वशिष्ठके पास जाओ। शायद उनकी पोथीमें कुछ लिखा हो। मान्य तब वशिष्ठके पास पहुँचीं। उन्होंने अपनी पोथी खोलकर देखा और बताया कि मंजरीका विवाह पश्चिम देशमें होना लिखा है। वहाँ बायीं ओर सुरहा और दायीं ओर गङ्गा बहती हैं। उसके आगे बेतवा नदी है। वहाँ तीनोंका संगम है वहीं बारह गौसीका गौरा गुजरात नाम प्रदेश है। वहाँ फाफा दूबै नामका एक कनौजी ग्वाल रहता है। उसके दो पुत्र हैं। बड़ेका नाम राँवरु है, उसका ब्याह सुरौलीमें राजा बामदेवकी लड़की मदागिनसे हुआ है। छोटेका नाम लोरिक है, वह अभी कुँवाँरा है। उसीके साथ उसका विवाह होगा। उसकी झापड़ी टूटी हुई है दरवाजा घिरा हुआ है, उसके दरवाजेपर अगोरका पेड़ है। उसीके निकट राजा सहदेव भी रहता है। उसके दरवाजे पर पानी वाला कुँआ है। उसके दालानमें पीतल के खम्भे लगे हुए हैं, उसके दरबारमें सोनेके चँवर लगे हैं और छतपर सोनेके मोर बैठे हुए हैं चौबीसों खिड़कियों और दरवाजे लगे हैं उसके भी एक कुँवारा लड़का है। धोखेसे उसके साथ मंजरीका तिलक न चढ़ जाये, इस बातका ध्यान रखना चाहिए। यह सुनकर मान्य मृत्युलोकमें गयाके पास पहुँचीं और बोली—मंजरीका विवाह लिखा हुआ है। यह सुनकर गयाने कहा—तुम मेरे साथ चलो। वे दोनों मंजरीके पास आयीं और उसके निकट बैठकर उससे उसका दुःख पूछने लगीं। मंजरीने कहा—तुम लोग मेरा दुःख पूछकर क्या करोगी ? उन्होंने उत्तर दिया—हो सकता तो हम तुम्हारा दुःख दूर करनेमें सहायक हों। तब मंजरीने अपनी सारी विपत्ति कथा कह सुनायी। सुनकर गया तो चुप रही लेकिन मान्यने उसका आँचल खींच कर उस पर वे सारी बातें लिख दीं जो वशिष्ठने उनसे कही थीं। फिर वे दोनों उठी और थोड़ी दूर जाकर अन्तर्ध्यान हो गयीं। उनके चले जाने पर मंजरी अपने आँचलकी ओर देखने लगी। उस पर गौराका सारा वृतान्त लिखा पाकर वह बहुत प्रसन्न हुए और अपने घर लौट आयी। सुबह होने पर वह माँके पास गयी और बोली—कहनेमें तो खराब होता है, लेकिन बिना कहे हुए कार्यकी सिद्धि भी नहीं हो सकती। आप कहती हैं कि सारे ब्राह्मण देश भरमें खोजकर परेशान हो गये मेरे योग्य कोई वर ही नहीं मिला। लेकिन मेरे योग्य वर है। अगर आप कहें तो मैं उसका पता बताऊँ। यह सुनकर पद्मा बोली—अगर तुमने अपने मनका कोई वर पसन्द कर लिया