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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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१६२ जाऊँगा। जब वहाँ पहुँच जाऊँगा तो वहाँसे मैं गुल्लीको पीछेकी ओर मारूँगा। बस आप अशोकके पेड़के नीचे रुक जाइयेगा। इतना कहकर लड़केने गुल्लीपर चम्पा मारा और मारते कूबड़ेके घरकी ओर बढ़ा। शिवचन्द भी अपने आदमियोंके साथ उसके पीछे-पीछे चले। कूबड़ेके दरवाजेपर पहुँचते ही लड़केने गुल्लीको पलटकर चम्पा मारा और मारता-मारता अपने स्थानपर लौट आया। इस तरह शिवचन्दने कूबड़ेके घरका पता पा लिया। वस्तुतः यह वैसा ही था जैसा मकरीने उन्हें बताया था। उत्तम कूबड़े व्यास घरसे बाहर निकले और देखा कि कुछ आदमी अशोकके नीचे खड़े हैं। पास आकर पूछा—आपका मकान कहाँ है और आप किधर जा रहे हैं। शिवचन्द ने अपना अभिप्राय कह सुनाया। शिवचन्दकी बात सुनकर कूबड़े प्रसन्न हो गये और तिलकवालोंके ठहरनेका प्रबन्ध करने लगे। फटा कम्बल और बोरोका पुआल डालकर अशोकके नीचे बिछा दिया। और फूटे घड़ेमें पानी भार हुया डुब्बा हुका लाकर रख दिया। शिवचन्दसे बोले—हाथ पैर धोकर जलपान कीजिये। मैं लड़केको बुलाता हूँ। अगर वह आपको पसन्द आये तो आप तिलक चढ़ाइये। शिवचन्दने कहा—बिना लड़का देखे मैं कुछ न करूँगा। यह सुनकर कूबन अपनी पत्नीको बेटोंको बुला लानेके लिए भेजा। माँकी बात सुनकर सँवरू नौरिक और सितारजारण तीनों दरवाजे ओर चल पड़े। जब घर पहुँचे तो तिलकवाले उन तीनोंका बड़े ध्यानसे देखने लगे। तीनों एक ही शदीके लग रहे थे अतः उन्होंने कूबड़ेसे कहा—मुझे तीनों ही आदमी एकसे जान पड़ते हैं। इसलिए मैं लड़केको पहचान नहीं रहा हूँ। तब कूबैने उनका परिचय कराया। शिवचन्दको लड़का पसन्द आ गया और उन्होंने तिलक चढानेका निश्चय किया। कूबड़ेने गाँव भरका निमन्त्रण भेज दिया। जब इसकी सूचना राजा सहदेवको मिली तो उन्होंने चतुभा डुगावरा बुलाकर यह ढिंढोरा पिटवा दिया कि जो कोई कूबड़ेके घर जायेगा उसके लड़के बच्चाकी गालमें भूख भर दिया जायेगा। ढिंढोरा सुनकर घर घरमें निस्तब्धता व्याप्त होने लगा। यह सुनकर सँवरू बहुत क्रुद्ध हुआ और बोला—इच्छा तो होती है कि सहदेवके गालमें घूंस मारकर उस मार डालूँ; लेकिन गुर्गीके असनपर कुचक्र स्थिति पैदा नहीं करना चाहता इसीसे मुझे चुप रह जाना पड़ता। दूसरे वह अपना राजा है नहीं तो अभी उसका सिर काट डालता। इस प्रकार खिन्न होकर घर सारी व्यवस्था करने लगा। उसने सितारजारनकी शादी पनवैयाँको बुलाया। मरदयी की ओर भी गुलरायन वगैरह गहना बुलाकर गहना पहनाया। सारी व्यवस्था हो जानेपर तिलकवान आंगन में आकर बैठे और पुरोहितने तिलककी सारी परम्परा की। शिवचन्दने तिलकका सारा सामान कूबड़ेके रखवाया। स्त्रियाँ मिलकर हार-श्रृंगार करने लगीं। उनकी सहायताके लिए स्वर्गसे रूपवान परियां भी आ गयीं और वे भी गाने लगीं। चारों दिशाओं में राग उड़ाती ऊंचे