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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३६३ चौसठ योगनियों लेकर आकाशमें गाने लगीं। इस प्रकार कूबैके आँगनमें गानेकी जो झंकार उठी वह सहदेवके गढ़ तक सुनाई पड़ी। सहदेवने खीझकर अपनी दासी को यह देखनेके लिए भेजा कि कौन-सी स्त्रियाँ उसके यहाँ मंगलाचार कर रही हैं। उनके भड़ोंकी नाकमें अभी मैं नूसा भरवाता हूँ। दासीने आकर देखा कि वहाँ गाँवकी कोई स्त्री नहीं है। केवल घरकी चार स्त्रियाँ हैं। और आकर राजासे यही बात कह दी। निदान वह चुप रह गया। पण्डितजीने शिवचन्दसे तिलक चढ़ानेको कहा और शिवचन्दने तिलक चढ़ाया। उसके बाद पण्डितजीने आशीर्वाद दिया। पश्चात् तिलकवालोंके लिए भोजनकी तैयारी हुई। भोजन कराकर कूबै मितारखण्ड गँवरू और लोरिकने भी भोजन किया। तदनन्तर पण्डितजी लग्न-पत्री बनाने लगे। तब कूबैने शिवचन्दसे कहा—आप गाँव वालोंको देख ही रहे हैं। उन्होंने हमसे वैमनस्यता ठान रखी है इसलिए बारातमें कोई भी अगोरिया नहीं आयेगा। आप बहुत बड़ा प्रबन्ध मत कीजिएगा। बारातमें केवल चार आदमी आयेंगे—लड़का लड़केका बड़ा भाइ गुरु और मैं। धीरे धीरे विवाहका दिन निकट आया। नहा धोकर जब लोरिक बारातके लिए तैयार हुआ तब मञ्जरिनने उसके सामने भोजन रखा और कहा—सात नदी और बीहड़ पहाड़ पार करना है। लेकिन इस बीच न तो तुम्हें भूख ही लगेगी और न तो तुम्हारी धोती खुलेगी। मञ्जरीसे विवाह कर जब कोहबरमें आओगे तभी भूख लगेगी और जब सेजपर बैठोगे तभी धोती ढीली होगी। लोकाचारके पश्चात् चारों आदमी बारातके रूपमें अगोरियाके लिए रवाना हुए और दरवाजेसे निकलकर गलियों में होते हुए सहदेवके महलके निकट पहुँचे। ऊपर कोठे पर सहदेवकी बेटी चन्दा बैठी थी उसकी दृष्टि लोरिक पर पड़ी और उसे देखते ही वह मूर्छित हो गयी। चन्दाको मूर्छित देखकर मुनिया दासीने उसे तत्काल जगाया और उसके मूर्छित होनेका कारण पूछने लगी। चन्दाने बताया—सूबे बारात ब्याहने जा रहा है। उसके पुत्र पर मुग्ध होकर मैं मूर्छित हो गयी थी। तुम माँसे आकर कहो कि उसी वरके साथ मेरा विवाह कर दें। गाँवका ही इतना सुन्दर वर विदेश ब्याहने जा रहा है। यदि उससे मेरा विवाह न हुआ तो मैं आत्महत्या कर लूँगी। यह सुनकर दासीको बहुत खेद हुआ और वह बोली—तुम्हारे जन्मको धिक्कार है। तुम राजाके घर जन्म लेकर उनके कुलमें कलंक लगाओगी। और फिर वह जाकर रानीसे बोली—चन्दा तुम्हारे घर बेटी नहीं शत्रु पैदा हुई है। कूबै तुम्हारे गाँवकी प्रजा है और वह उसीके बेटेसे विवाह करना चाहती है। रानीने जब यह सुना तो वह दासी पर ही नाराज हुई। बोली—मेरी बेटीको झूठा कलंक लगा रही है। और उसे मारने लगी। दासीने कहा—चलकर अपनी बच्चीका हाल देखिये। चन्दाके पास जाकर जब रानीने उसकी अवस्था देखी तो कहने लगी—बच्चे