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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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वह अन्दर गयी और कपड़ा पहनकर तैयार हुई और और सूर्यसे आँचल पसारकर विनय की कि मेरे लाजकी लाज रखिये। और विनय करके चम्बेली की पंखनी एकमे ही जोड़कर महराको दे दिया और बोली—कि दोनों पंखनीमें पानी भर दें। इनमें जितना पानी रहेगा, उसमें धरिरकी बारात सात बार पाँव पखारेगी फिर भी यह नहीं घटेगा। इस प्रकार जब काकाकी वह माँगकी पूर्ति हो गयी तो उसने दूसरा पत्र लिख वाया और कहा कि बारह स्तनोंवाली ऐसी वस्तु भेजिए जिसकी धार एक ही हो। इस बातका अर्थ जाननेके लिए महरा मुहल्ले भरमें घूमता फिरा लेकिन किसीसे उसकी पूर्ति न हो सकी। तब वह मलयगिरिके दरबारमें पहुँचा। जब वहाँ भी कुछ न हो सका तो घर लौटकर कुत्सित होकर रानी पद्मासे कहने लगा—बेटी मंजरीके कारण मेरी दुर्गति हो रही है। मञ्जरीने जब यह सुना तो बोली—आप जरा-सी बातमें घबड़ा जाते हैं और बेटीके भाग्यको दोष देने लगते हैं। कुम्हारके यहाँ चले जाइए और उससे एक करवा बनवाइए, उसमें बारह छेद करवा दीजिए और उसके ऊपर एक टोंटी लगवा दीजिए और उसीको भेज दीजिए। महराने वही किया। इस प्रकार उनके माँगकी पूर्ति हो गयी। दोनों ओरकी प्रतिस्पद्धा समाप्त हो जानेपर विवाहकी तैयारी होने लगी। जब यह सूचना मलयगिरिको मिली तो उसने अपने भँवरानन्द नामक हाथीको शराब पिलायी। शराब पीकर जब हाथी नशेमें चूर हो गया तब उसे लोहेकी अस्सी मनकी जंजीर पकड़ा दी और बारातको रास्तेमें ही रोक देनेके लिए भेजा। हाथीने महराके मुख्य दरवाजे को रोक दिया। जब सँवरूकी बारात द्वारके निकट पहुँची तो हाथीने पीछे घूमकर जंजीर घुमाना शुरू किया। फलतः बारात बादलोंकी तरह फटकर भाग निकली। सँवरू और मिला एक किनारे हट गये। लोरिक भी एक तरफ होकर हाथीकी मार बचाने लगा। जब हाथी दाहिने घूमे तो वह बाय तरफ उछल जाय और जब वह बायें घूमे तो लोरिक दाहिने उछल जाय। जिस प्रकार हाथी घूमे लोरिक भी उसी प्रकार घूम जाय। अन्तमें लोरिकने खड्ग निकालकर मलयसि हाथीको ललकारा। जब सूँड घुमाकर हाथीने लोरिकपर जंजीर चलाया तो लोरिक उछलकर एक बगल हो गया और कूदकर खड्गसे हाथीके गरदनपर वार किया। हाथीका सिर धड़से अलग हो गया। लोरिकने सूँडको उठाकर इतने जोरसे फेंका कि वह मलयगिरिके दरवाजेपर जा गिरा और सिर पैरको पकड़कर इतने जोरसे घुमाकर फेंका कि वह चौताके सीमापर जाकर गिरा। लोरिककी ऐसी शक्ति देखकर सँगौरिवास्त नर-नारी दंग रह गये। बारात महराके द्वारपर पहुँची। द्वारपूजाके पश्चात् विवाहका काम आरम्भ हुआ। सँवरूने मिलासे कहा—यहाँका राजा बहुत चालाक है। अगर हम होशियार नहीं रहे तो हो सकता है मण्डपमें ही छले जायें। अतः आप सतर्क होकर द्वारपर या

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