भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 401, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 401

१७ कास कटवाकर मंगाओ। कासको कूटकर धूपमें सुखाओ फिर उसकी रस्सी बनाओ और उसका गोलाकार लपेट लो और फिर नाँव मंगाकर उसे ठीकसे रख दो; बादमें उसमें आग लगा दो। रस्सी जलकर कोयला हो जायेगी फिर भी वह ज्योंकी त्यों बनी रहेगी। उसीको उसके पास भेज दो। संबरू ने वैसा ही किया और महरा की इच्छा पूरी कर दी। यह देखकर महरा मूर्च्छित हो गया और कहने लगा—विश्वेश्वर, तुम कहते हो कि महराकी बारातमें एक भी बुड्ढा नहीं है। बिना किसी बुड्ढेके मेरी यह मांग कैसे पूरी हुई। विश्वेश्वरने उसे समझाकर कहा—मुग्गेका बड़ा लड़का लंबरू बड़ा चतुर है। वही सबको पूरा कर देता है। तब उन्होंने फिर दूसरी मांग भेजी कि हमने मडप तैयार कर लिया है! १६ पोरकी साठी भेजो जिससे हम उसको उठाकर आँगनमें लगा सकें। इस बातको भी संबरू ने काकासे कहा और काकाने बताया—सोनपीके किनारे कुशके पुराने हूर होंगे। उन्हें जड़ सहित उखाड़कर ले आओ। प्रत्येककी जड़में अनागिनत पोर होंगे। उसीको गिनकर तुम उसके पास भेज दो। इस तरह संबरूने उनकी उस माँगको पूरी करके भेज दिया और यह भी लिख भेजा कि भांजी हुई रसद समाप्त हो गयी है। रसदका प्रबंध करके जल्दी भेजिये। यह पत्र पाकर महरा घबरा उठा और तत्काल कहला भेजा—लगनकी घड़ी समाप्त हो रही है अपलोग बारात लेकर आइये। यह बात जब संबरूने काकासे कहा तो वे बोले—महराने हमें इतना परेशान किया। अब जब तक वे हमारी बात पूरी नहीं करेंगे, तब तक हम बारात लेकर न जायेंगे। तदनुसार संबरूने लिख भेजा हमारे कुलकी रीति है कि बेटीवाला बारातके पाँव पखारनेके लिए एक जोड़ी भुँझुआ भेजता है। जब तक वह नहीं आता तब तक बारात आपके दरवाजे नहीं आ सकती। यह सुनकर तो महराके होश गुम हो गये। अडोस-पड़ोससे पूछने लगा—यह भुंझोका क्या मँगता है हम कैसे भरें। जो सुनता वही आश्चर्यचकित रह जाता। तब महरा मन्दारसिंहके दरबारमे गया। वहाँ भी भुंझोके माँगकी बात कही। सब दर बारी सुनकर दंग रह गये। महराने बताया—जब तक बरातियोंकी यह माँग पूरी न होगी वे मेरे दरवाजे नहीं आवेंगे। परन्तु कोई भी इसका निराकरण न कर सका। हताश महरा घर लोट आया और खाट पर पड़ रहा। मन्दोदने जब सुना तो बोली—चौदह वर्षंतक आप उसको परेशान कर रहे थे। अब जब उन्होंने एक साधारण-सी मांग की तो आप परेशान हो गये। आप मेरी ननदी चन्दोके पास जाइये। उनसे कहियेगा वह सारा प्रबन्ध कर देगी। महरा तत्काल सुखदीके पास गया और उससे सारी बात कही। सुनकर वह बोली—यह कौनसी बड़ी बात है।