चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंछप्पन नीचे गिर पड़े। इस प्रकार राज्यके मकानोंको गिराता हुआ लोरिक जब आगे बढ़ा तो उसने देखा कि एक धिक्कार टँगा हुआ है जिसमें लिखा था कि चौछापर बिना हमसे लड़े और हमें बिना पराजित किये जाओगे तो मैं यही समझूँगा कि तुम डरकर भाग गये। उसे पढ़कर लोरिकने चौछा पहुँच कर रुकनेका निश्चय किया। जब महराने देख लिया कि लोरिक और मंजरी नगरसे बाहर पहुँच गये तो वह अपना वचन पूरा करनेके लिए राजाके यहाँ पहुँचा। बोला—बेटीका विवाह कर मेरी जाँघ पवित्र हुई और मेरा वचन भी पूरा हो गया। अब यदि आपमें शक्ति हो तो लोरिकको मार कर सहप मंजरीका डोला अपने घर ले आयें। यह सुनकर मलयगिन्नने पानका बीड़ा रखा और घोषणा कर दी कि जो वीर बीरा बनायेगा उसे डालभर सोना इनामम मिलेगा। महराके दामादको मार कर मञ्जरीको गढ़में लानेपर उसे आधा राज्य दिया जायगा। यह सुनकर जुबरी पण्डितको लालच हुई और उन्होंने पानका बीड़ा उठाकर खा लिया और कांखमें पोथी-पत्रा दाब कर चौछाकी ओर चले। नगरसे बाहर आते ही लोरिककी नजर उनपर पड़ी और उसन मंजरीसे कहा—एक आदमी अंगोरियासे आता हुआ जान पड़ता है। जरा देखो तो कौन है। मंजरीने देखकर कहा—यह तो विवाह कराने वाले पण्डितजी हैं। मालूम होता है जेठजीने उनकी कुछ दान दक्षिणा रोक ली है। हो सकता है और कोई दूसरी ही बात हो। आ रहे हैं तो उनका आदर-सत्कार कीजिये। जब पण्डितजी निकट आये तो लोरिकने उन्हें प्रणाम किया। पण्डितजीने आशीर्वाद दिया। लोरिकने कन्धेसे चादर उतार कर बिछा दिया और बैठनेके लिए कहा। कुशल क्षेम पूछनेपर जुबरी पण्डितने कहा—घरपर तो सब कुशल है। इस समय मैं तुम्हारी ही कुशल कामनासे आया हूँ। तुम एक स्त्रीके लिए नाहक अपने प्राण दे रहे हो। तुम्हारे विरुद्ध मलयगिन्नने अपनी बेशुमार फौज खड़ी कर रखी है और वह अपने सब नाते-रिश्तेदारोंके पास खबर भेज रखा है। नौगढ़के सोम्भारको अपने किलेमें बुलाकर रख छोड़ा है। मेरा कहना मानो मञ्जरीको छोड़ दो। मैं उसे मलयगिन्नके दरबारमें पहुँचा आऊँ। तुमको उसके दूने वजनके बराबर धन तौल कर दिलवा दूँगा। तुम गौरा वापस जाकर दूसरी शादी कर लेना और उसी स्त्रीको मञ्जरी समझ लेना। इतना सुनना था कि लोरिक जलकर अंगार हो उठा। बोला—मलयगिन्न का मुझे तनिक भी डर नहीं। उसके घरको मैं गिरा आया उसकी फौज मैंने मार डाली और उसके देखते-देखते अपना डोला चौछाके किनारे तक ले आया। अब तक मैं कभीका गउरा गुजरात जा चुका होता लेकिन उसका धिक्कार सुनकर रुका हुआ हूँ। मलयगिन्नके गर्वको तोड़कर ही मैं यहाँसे जाऊँगा। राजाके गढ़में जो भी बहू बेटी हों उन्हें यहाँ ले आओ और उनके वजनका दूना धन मुझसे लेकर जाओ। मैं