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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 407

१७६ यह सुनते ही सँवरू बेहोश हो गया। होश आनेपर वह कनकासे गया और लोरिकके मारे जानेकी सूचना दी। मिया गुरूको इस बातपर तनिक भी विश्वास न आया। बोले—अपने शिष्य- को मैं जानता हूँ। वह भेड़-बकरी नहीं है, जो रातमें कोहबरमें मारा जाये जान पड़ता है किसी शत्रुसे उसकी मुठभेड़ हुई थी और उसे मारकर उसने मंडपमें टांग दिया और खुद मस्त होकर सो रहा है। इसलिए चलो चल कर मुण्डकी पहचान तो की जाय। और सँवरूको लेकर मिया अगोरियाकी ओर चल पड़े। मंडपमें पहुँचकर उन्होंने मुण्डको उठा लिया और देखकर बोले—यह सिर हमारे शिष्यका नहीं वरन् उसके पँवारका है। मेरा शिष्य तो कहीं सोता होगा। यह सुनते ही अगुनियां दौड़ी हुई कोहबर के दरवाजे पर पहुँची और धक्का देकर दरवाजा खोल और भीतर घुस गयी। देखा—वहाँ पति-पत्नी दोनों ही थे। लोरिक तत्काल कमरेसे बाहर आया। उसे जीवित देख सँवरूकी प्रसन्नताका वारपार न रहा। उसने दहेजमें मिली चीजोंको बरातियोंमें बाँट दिया और उन्हें अपने घर जानेको कह दिया। कूचे काका भी समधियानसे मिले सामानको लेकर घरकी ओर चल पड़े। अगोरियामें केवल सँवरू और लोरिक दोनों भाई रुक गये। कुछ दिन बाद सँवरू भी दहेजमें मिले जानवरोंकी व्यवस्था कर गौरा गुजरात चले गये। अन्तमें लोरिककी विदाई हुई। पाल्की ढोने वाले कहारोंने पूछा—किस रास्ते चला जाय ? लोरिकने कहा—यदि हम चुपचाप अपना डोला ले चलें तो राजा मल्ल पित अपनी बड़ाई करेगा और कहेगा कि अहीर निबल था इसलिए अगोरिया छोड़ कर भाग गया। तुम लोग डोला अगोरियाके बीच बाजारसे उस रास्तेसे ले चलो, जो उसके दरबारसे होकर जाता हो। कहार उसीके अनुसार चल पड़े। जब राजा मल्लपतिको सूचना मिली कि महरका दामाद डोला लेकर जा रहा है तो उसने अपनी फौजको तैयार होनेका आदेश दिया। फौज किलेसे निकल कर गलीमें पहुँची। एक ओर राजा मल्लपतिकी विशाल सेना और दूसरी ओर अकेला लोरिक। लोरिकपर हथियार गिरने लगे। लोरिकने भी अपनी साँड़ खींच ली। उसकी चका चौंधसे पल्टन थर्रा गयी। लोरिक साँड़ चलाने लगा और गलीमें खूनकी नदी बह निकली। थोड़ी देरमें मल्लपतिकी फौज भाग चली। युद्ध जीतकर लोरिक अपने डोलेके साथ आगे बढ़ा। मल्लपतिके मकानके सामने पहुँचकर डोला उसके सायेमें अटक गया। यह देख कर लोरिकने अपनी टाँगी चलायी और मकान ढह पड़ा। डोला फिर आगे बढ़ा। पहली ड्योढ़ी पार कर दूसरी ड्योढ़ीपर पहुँचा। वहाँ मल्लपतिका हथिसार था। लोरिकने उसे अपनी टाँगीका मजा दिया जिससे मकान हिल उठा और उसके