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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३७९ अत्यन्त दुखी हुई और बोली—इज्जत बचानेका जो साधन मेरे पास था उसे तो आपने फेंक दिया। अब मैं अपनी इज्जत किस प्रकार बचाऊँगी ? इतनेमें सेना निकट आ पहुँची। लोरिक भी लंगोट कस कर तैयार हो गया। गौराके देवी देवताओं को स्मरण कर उसने म्यानसे खाड़ बाहर निकाल ली। जब सेनाने लोरिकको चारों ओरसे घेर लिया तब लोरिकने सैनिकोंको ललकारा और ललकार कर लगा उन्हें मारने। लोरिक को लड़ते देख मलयगिलसे उसके मन्त्रीने कहा—जब तक यह अहीर लड़ रहा है तब तक मजरीका डोला यहाँसे उठाकर रनिवासमें ले जाकर बैठा दिया जाय। वह जब वहाँ पहुँच जायेगी तो आपकी हो ही जायेगी। उसके बाद तो यह अहीर शर्मके मारे जा छिपेगा। यह सुनकर मलयगिलने मञ्जरीका डोला उठाने का आदेश दिया। संकट आया देखकर मञ्जरी डोलेसे बाहर निकल आयी। साड़ीको फाड़कर मूसल उठा लिया और उसीसे फौजपर आघात करने लगी। एक ओरसे मञ्जरी फौज पर आघात कर रही थी और दूसरी ओरसे लोरिक। दोनों सेनापर आघात करते करते आमने-सामने आ पहुंचे। मञ्जरीने मूसल चलाया लोरिकने उसे खड्गपर रोक लिया। और तब दोनोंने एक दूसरेको पहचाना। लोरिक बोला—मैं सेनाको अकेले मारनेके लिए पर्याप्त हूँ। तुम क्यों जूझ रही हो ! सेनाको अकेले मार कर ही मैं तुम्हें ले जाऊँगा नहीं तो तुम घर जाकर अपनी बड़ाई करोगी कि पतिके साथ मैं भी लड़ी थी और लड़कर मैंने ही जीत करायी। इस तरहकी बातमें मेरी बदनामी होगी। इतना कहकर लोरिकने मञ्जरीको अलग कर दिया और फिर जूझने लगा। सवा पहर तक लड़ाई होती रही। अन्तमें सेना मर कर समाप्त हो गयी। मलयगिलने हार कर अपने भानजे निर्मल परिहारको तमाम सेना लेकर आनेको कहना भेजा। सूचना मिलते ही निर्मलने छत्तीस हजार सेना तैयार करायी। घर में नयी आयी बहुने उसे रोकनेकी कोशिश की परन्तु उसकी बात अनसुनी कर वह अगारिया पहुँचा। तत्काल अपने हाथी कलुआको मदमस्तकर अस्सी मनकी जंजीर देकर लोरिककी ओर भेजा। कलुआ इन्द्रका हाथी था और उसे उन्होंने अपने भक्त निर्मलको दिया था। उसे आते देख मञ्जरी डोलेसे बाहर निकल पड़ी और एक पैरपर खड़ी होकर कहने लगी—जिस समय मैं इन्द्रपुरीमें थी उस समय मैंने तुम्हारी बहुत सेवा की थी; उस बातका ध्यान रखकर इस सिन्दूरकी रक्षा करो। मञ्जरीकी बात सुनते ही हाथी लौट पड़ा। उसे लौटते देख निर्मलने सोचा कि अभी उसे पूरा नशा नहीं हुआ है। अतः पुनः उसे नशा पिलाकर वापस भेजा। उसे आते देख मञ्जरीने लोरिकसे कहा— मालूम होता है निर्मलने इस बार उसे नशा पिला दिया है इसलिए वह इस बार मेरी बात नहीं मानेगा। उसका सामना करनेके लिए तैयार हो जाओ।