चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 411, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें१८
हाथी शरीर उठाकर घुमाने लगा। लोरिक उसे बचाकर इधरसे उधर हो जाता। इस तरह बचाव करते करते जब सवा पहर बीत गया। तब हाथीने मौका पाकर लोरिकको अपनी सूँडमे पकड़ लिया और अपने पैरके नीचे दबाकर चीत्कार करने लगा। उसकी चीत्कार सुनकर निर्मलने मलयगिरिसे कहा कि तुम्हारा दुश्मन मारा गया। लेकिन तत्काल देवी लोरिककी सहायताके लिए आ पहुँचीं। दाबनेके लिए हाथीने जैसे ही पैर उठाया वैसे ही लोरिक कूदकर दूर जाकर खड़ा हो गया। देवीने खड्ग चलानेका आदेश दिया। लोरिकने साठ पुरण ऊपर कूदकर हाथीकी सूँडपर खड्ग चलायी। हाथी व्याकुल होकर भाग चला। निर्मलने जब यह देखा तो बोला— यह तो अनहोनी बात हो गयी; और वह क्रुद्ध होकर अपनी सेना लेकर बाहर निकला और अग्निबाण चलाने लगा। लोरिक उनको अपनी ढालसे रोकने लगा। जब निर्मलके सारे अग्निबाण समाप्त हो गये तब उसने चक्र चलाना शुरू किया। इस प्रकार उसने एक एककर अपने सभी अस्त्र शस्त्र चलाये। जब वे सब-के सब समाप्त हो गये तब निर्मल और लोरिक दोनों आपस में भिड़ गये। इस प्रकार लड़ते-लड़ते जब सवा पहर बीता तब देवी अलन्त हुडाका रूप धारणकर वहाँ पहुँचीं और बोलीं—हमने तो ऐसी लड़ाई नहीं देखी जिसमें आपसमें गुथकर लड़ते हों। यदि तुम क्षत्रियोंके वंश हो तोएक दूसरेसे अलग होकर लड़ो। यह सुन दोनों एक दूसरेको छोड़कर अलग हुए। निर्मल दस लोरिक बीस दूर हटा। जब दोनों ढाल लेकर लड़नेको तैयार हुए तब देवी लोहेकी सूई बनाकर वहाँ डाल गयीं, जिसमें निर्मलका पैर उलझ गया। लोरिकने तत्काल साँङ चलायी निर्मल जमीनपर गिर गया। निर्मल फिर उठकर खड़ा हुआ तो लोरिकने दूसरा हाथ मारा और निर्मलका सिर कटकर अलख जा गिरा। वह सिर इन्द्रके यहाँ पहुँचा। उसे देखते ही इन्द्रने कहा कि अभी तुम्हारी मृत्यु नहीं है वापस जाओ। वह सिर पुनः लौटकर निर्मलके धड़से जुड़ गया। सिर जुड़ते ही निर्मलने हथियार उठाया। लोरिकने दुबारा साङ चलायी और सिर कटकर फिर इन्द्रके पास पहुँचा। इन्द्रने उसे पुनः वापस भेज दिया। इस प्रकार लोरिकने छः बार सिर काटा और हर बार वह इन्द्रके पास गया और लौट आया। जब सातवीं बार आकर सिर धड़से जुड़ा और लोरिकने मारनेको साङ उठाया तो देवीने चेतावनी दी कि यदि इस बार उसका सिर इन्द्रके पास पहुँच गया तो अमर हो जायेगा और वह फिर किसी भी उपायसे मारे नहीं मरेगा। इसलिए बायें हाथसे मारो और दायें हाथसे उसे पकड़ लो। तदनुसार लोरिकने दाहिने हाथसे खड्ग चलायी और बायें हाथसे उसका सिर पकड़कर भूमिपर पटक दिया। फिर निर्मलकी रही सही सेनाको भी मार भगाया। फिर वह अपनी पत्नीके डोलेके पास आकर बैठ गया। उधर गौरामें लोरिककी माँ कुन्दनाने स्वप्न देखा कि बेटेके साथ युद्ध हो रहा है। वह तत्काल गुरु सिताके पास पहुँची और स्वप्नकी सारी बातें कह सुनायीं। सिताने