चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८४ जब चदाने बठवाको पीछा करत हुए आते देखा तो पास ही भैंस चराते वाले चरवाहेको देखकर बोली—तुम मेरे धर्म के भाई हो। चमार मेरा पीछा कर रहा है। उसे मत बताना कि यहाँसे मैं गयी हूँ। इस प्रकार रास्तेमें जितने लोग मिले सबसे विनय करती हुए वह आगे बढ़ती गयी और शीघ्र ही वह गौरा अपने महलमें जा पहुँची। बठवा भी उसका पीछा करता हुआ गाँवमे पहुँचा और गाँवके लोगोंसे कहने लगा—चदासे मेरी शादी करा दो। लेकिन किसीने उसका उत्तर न दिया। राजा सहदेव भी उसको आते देख बहुत घबराये और महलमें छिप रहे। बाहर न निकले। जब किसीने उसकी बात न सुनी तो उसने गायोंकी हड्डी इकट्ठी की और गाँवके सभी कुओंमें डाल दी। इस प्रकार कुँओंको भ्रष्ट कर उसने सब पनघटको रोक दिया केवल उस कुएँको बख्श छोड़ जिसका पानी मिता और लोरिक भरते थे। इस तरह पानीका अभाव करके बठवाने गाँवके सभी लोगोंको परेशानीमें डाल दिया। उन्हें एक बूँद पानी मिलना कठिन हो गया। जब बुढ़िया कुण्डन अपने कुएँसे पानी भरकर मकानकी ओर जाती तो गौराके स्त्री-पुरुष रास्तेमें उससे माँगकर पानी पीते। इस प्रकार बीचमें ही उसके घड़ेका पानी समाप्त हो जाता। निदान वह दुबारा पानी भरने जाती। इस तरह बार-बार पानी भरते-भरते जब वह थक गयी तो मंजरी पानी भरने आयी। जब वह पानी भरकर गाँवमें घुसी तो लोग पानीके लिए दौड़े। पानी बाँटकर वह दुबारा कुएँ पर आयी। इस बार जब वह पानी भरने लगी तो बठवाने, जो अब तक चुपचाप बैठा था मंजरीसे कहा—तुम मेरे गुरुभाई की पत्नी हो। नाहक शत्रुता मोल ले रही और मेरे काममें विघ्न डाल रही हो। मञ्जरीने पूछा—तुम्हारे किस काममे विघ्न डाल रही हूँ! मैं तुमसे कौन-सी तकरार कर रही हूँ। बठवाने उत्तर दिया—तुम गौरामें मेरा विवाह होना रोक रही हो। गाँवके लोग चदासे मेरा विवाह नहीं कराते, इसलिए सब लोगोंको मैं बिना पानीके मार डालना चाहता हूँ। लेकिन तुम पानी भरकर उनको बाँट रही हो। इस बार पानी ले जा रही हो तो ले जाओ फिर लौटकर मत आना। यह सुनकर मंजरी चुपचाप चली गयी और लोगोंको फिर पानी बाँट दिया। जब वह पुनः कुएँकी ओर लौटी तो बठवा उठ खड़ा हुआ और बोला—मैं तुम्हें पानी भरने नहीं दूँगा। यदि तुम सीधे नहीं मानोगी, तो डोरी छीन लूँगा। इतना सुनना था कि मंजरी आग बबूला हो गयी। उसने डोरी कुएँमें फेंक दी और दोनों घड़ोंको कुएँ पर पटक दिया। वह रोती हुई घर पहुँची। कुण्डनसे बोली—पतिके रहते मेरा अपमान हुआ है। मैं जहर खाकर मर जाऊँगी। बठवाने