चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमेरा रास्ता रोका है। यदि मुझे जीवित देखना चाहती हो तो तत्काल पुढ़ियापुर जाकर स्वामी को सूचना दो और उन्हें बुला लाओ। उसकी बात सुनते ही सुखदिन पुढ़ियापुर पहुँची। मिता और लोरिक दोनों डंड रहे थे। माँ को आते देख दोनों खड़े हो गये और अगवाइक बाहर आये। माँ से कुशल पूछने लगे। माँने सारी स्थिति कह सुनायी। सुनकर लोरिक गुस्सेसे लाल हो गया और गुरु मिताका आशीर्वाद लेकर गौराकी ओर चल पड़ा। बठवाने उस देखते ही नमस्कार किया और अपने आनेका उद्देश्य कह सुनाया और कहा कि उसने कुएँ का छोड़ रखा है जिसमें वह और मिता पानी भरते हैं। अन्तमें बोला—तुम और मिता भले ही पानी भरो लेकिन दूसरोंको मैं पानी भरने न दूँगा। यदि तुम मेरे गुरुभाइ न होते तो इसमें भी हड्डी डाल देता। अभी मैंने पानी रोका है पीछे रास्ता भी रोक दूँगा। यह सुनकर लोरिक बहुत बिगड़ा। बोला—चमार होकर तुम अहीरकी बेटीसे विवाह करना चाहते हो। पहले मुझसे हाथ मिलाओ पीछे चंदासे शादी करना। फिर क्या था। दोनों परस्पर भिड़ गये। लोरिकने बठवाके दोनों पैरोंको पकड़कर ऊपर उठा लिया और इस प्रकार पटका कि वह दूर जाकर गिरा फिर वह उसकी छातीपर सवार हो गया और कटार निकाल ली। कटार निकलते देख बठवाने दुहाइ दी—तुम मेरे गुरुभाइ हो। जीवनभर डरकर मानूँगा; मुझे छोड़ दो। लोरिकने कहा—यदि मैं तुम्हें यों ही छोड़ देता हूँ। तो तुम जाकर गवरण अपनी बड़ाई करते फिरोगे। इसलिए तुम्हें गौरा आनेकी सौगात मिलनी ही चाहिए। और उसने उसका दाहिना आधा हाथ और नाक काट ली। लोरिकने बठवाको गौरासे भगा दिया यह सूचना जब महुवरके महलोंमें पहुँची तो उसकी खुशीका कोई ठिकाना न रहा। चंदाने मन ही मन निश्चय किया कि लोरिकने मेरी हर तरह रक्षा की है मैं अपनी इच्छा उसे ही दूँगी। यदि उन्होंने मुझे अपने साथ रखना स्वीकार नहीं किया तो मैं किसी औरके साथ नहीं जाऊँगी वरन् जहर खाकर मर जाऊँगी। यह निश्चय कर वह लोरिकसे भेंट करनेका उपाय सोचने लगी। राजाको एक पत्र लिखा कि मेरी इज्जतकी रक्षा हुई है इस खुशीमें आज सारे लोग पिखालियोंको दावत दीजिए। राजाको यह बात पसन्द आयी। उसने तत्काल सबको आमंत्रित करनेकेलिए न्योतहारको भिजवा भेज दिया। दावतके दिन बड़े जोरका धूम धाम था। उन सारे दावतका प्रबन्ध लोरिकपर सौंपा गया। लोरिक निःसंकोच पैर हिला और ... ... ...