चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१८६ उसे उठाकर लोरिक ऊपर देखने लगा। चंदाको देखते ही वह खाना भूल गया और पानी पीनेके बहाने बार-बार ऊपर देखने लगा। ज्योनार समाप्त होनेके बाद वह घर आकर अपनी माँसे बोला-सहदेवके घर ज्योनार अच्छी नहीं थी। थोड़ा चबेना दो। चबेना लेकर वह घरसे बाहर निकला और गाँवके दो-चार लड़कोंको साथ लेकर जंगलमें पहुँचा। लड़कोंसे काँस- कुश कटवाकर एक बरहा (मोटी रस्सी) तैयार करवायी। उसे लेकर वह गाँवमें लौट आया और उसे उसने अपने मित्र शिवचन्द्र कान्दूके घर रख दिया। जब शाम हुई और सब लोग खा-पीकर सो गये तो लोरिक घरसे निकला और अपने मित्रके घरसे बरहा लेकर राजा सहदेवके मकानके पीछे जा पहुँचा। मकानके झरोखेके पास खड़े होकर उसने बरहा ऊपर फेंका। उसकी आवाज सुनकर चंदा चौंक उठी। उसने खिड़की खोलकर नीचे देखा। लोरिकने बरहा फिर ऊपर फेंका। चंदाने उसे पकड़ लिया। जब लोरिक उसके सहारे ऊपर चढ़ने लगा तब चंदाको घबराहट सूझी। उसने रस्सी छोड़ दी, लोरिक नीचे गिर पड़ा और गाली देने लगा। फिर कुछ रुककर दुबारा रस्सी फेंकी और बोला-यदि इस बार तुमने रस्सी छोड़ी तो फिर पछताओगी। इस बार चंदाने रस्सी लेकर खिड़कीमें बाँध दी और उसके सहारे लोरिक ऊपर पहुँच गया। रातभर दोनोंने आनन्द मनाया। सुबह होनेसे पहले ही लोरिक खिड़कीसे उतरा, रस्सी अपने मित्रके घर रखकर, घर आकर सो रहा। यह क्रम दस-पाँच दिन चलता रहा। एक दिन चन्दाकी चादरसे लोरिककी चादर बदल गयी। चन्दाकी चादर सिरपर बाँधकर लोरिक घर चला आया। सुबह जब महरी आँगन बुहारने उठी तो उसकी नजर लोरिकपर पड़ी और वह ठठाकर हँस पड़ी। सासको बुलाकर बोली- जरा बाहर आकर देखो तो। धोबीका सामान आया है। लोरिकने जब यह सुना तो चादर उठाकर देखा; फिर पीछे हटकर मित्राके घर गया। वहाँ जाकर मित्रकी पत्नीसे बोला-आज तो मेरी बेइज्जती होना चाहती है। रातमें चन्दाके घर गया था; वहाँ मेरी चादर बदल गयी। ऐसा उपाय करो जिससे कोई कलंकी बात न जानने पावे। यह सुनकर मित्रकी पत्नी खिसिया उठी। उसने चादरको ले ली। उसको बाकायदे तह कर रखी थी और फिर महरूकी ओर चल पड़ी। रातभर जागनेके कारण चन्दा अतल नींदमें सोयी थी। जब मुन्दिया दासी उसे जगाने आयी तो उसके पास उसने लोरिककी चादर पड़ी देखी। उसने चन्दाका मुँह सूजा और शृंगार बिखरा हुआ देखकर वह रानीके पास पहुँची और बोली- जान पड़ता है कि चन्दाकी किसी पुरुषसे भेंट हुई। उसकी स्थिति तो है सो है ही; उसका प्रमाण भी पलंगके पास पड़ा है। यह सुनकर चन्दाकी माँ उसके पास पहुँची और पूछा-रात कौन आया था। चन्दाने उत्तर दिया-मैंने अपनी चादर धुलानेके लिए भेजी थी। धोबिन उसे धोकर देरसे दे गयी। मैं रातभर उसे ओढ़े रही और सुबह तह कर सिरहाने रख दिया। पता नहीं कि चादर किस तरह बदल गयी।