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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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यह बात हो ही रही थी कि बिरजा पहुँची और खिसियाकर बोली—रात मुझसे भूल हो गयी। मैं दूसरेकी चादर तुम्हें दे गयी। अपनी चादर ले लो। इस प्रकार वह लोरिककी चादर लेकर घर आयी और लोरिकको दे दिया। चन्दाकी बातपर पर्दा पड़ गया और लोरिक उसके पास फिर उसी तरह आने-जाने लगा। इस तरह कुछ दिन बीते। जब चन्दा गर्भवती हो गयी तो सारे गाँवमें इसकी गुपचुप चर्चा होने लगी। तब चन्दाने लोरिकसे कहा कि अब यहाँ रहना कठिन है। जहाँ चार स्त्रियाँ एकत्र होती हैं वहीं हम दोनोंकी चर्चा शुरू हो जाती है। इस तरह मेरी बदनामी हो रही है चलो हम दोनों कहीं भाग चलें। लोरिकने कहा—भादों समाप्त होने दो कुँवार आनेपर मैं तुमको भगाकर ले जाऊँगा। चन्दाने उत्तर दिया—यहाँ एक दिन भी ठहरना कठिन है। शामसे सुबह होनेतक मौत भी हो ले सकती। लोरिकने तब कहा—रास्तेका कुछ खर्च एकत्र हो जाने दो। भाईसे छिपकर कुछ जमा कर लूँ तो ले चलूँगा। चन्दाने कहा—तुम्हारी बुद्धि मारी गयी है। तुम पचीस-पचास एकत्र करोगे। इतनेमें रास्तेका खर्च कैसे चलेगा। खर्चकी चिन्ता तुम मत करो। पिताका घर भरा हुआ है। मैं सोनेकी एक पिटारी चुरा लूँगी तो दैवने १२ कत्तक दुर्भिक्ष पडे तब भी हम दोनोंका पाला नहीं छूटेगा। यह सुनकर लोरिकने पूछा—किस देश चलनेका इरादा है! चन्दाने कहा—करीब ही बंगालमें हरदी देश है। वहाँका राजा महुबरी जातिका है। उसके यहाँ धन अपार है। उस नगरमें महीपचन्द नामक बनजारा रहता है। वहीं मेरा चलनेका इरादा है। वहीं हम लोगोंका गुजारा हो सकता है। वैसे जैसी तुम्हारी मर्जी। इस प्रकार जब हरदी चलनेकी बात हो गयी तो चन्दाने कहा कि हरदी चल तो रहे हैं लेकिन इस बातका वादा करो कि तुम महुबरीके राजा और महीपचन्द पर कभी हाथ न उठाओगे। लोरिकने इसका वचन दे दिया। तदनन्तर दोनोंने पलायनकी योजना बनायी। लोरिकने कहा—अगर तुम पहले घरसे निकलो तो गौराके मुख्य मार्गसे आगे बढना और रास्तेमें जहाँ-तहाँ सिन्दूरका टीका लगा देना और आगे चलकर पकड़ीके पेड़के नीचे मेरी प्रतीक्षा करना। यदि मैं पहले बाहर निकला तो जहाँ-तहाँ मैं अपनी खाँड़ेसे निशान बना दूँगा। इस प्रकार शुक्रवार या सोमवार चलनेका दिन निश्चित हुआ। लोरिक अपने घर लौट आया। दूसरे दिन सुबह जब चन्दा शौचके निमित्त बाहर निकली तो रास्तेमें मजरीसे उसकी भेंट हो गयी। मजरीने चन्दासे पूछा—तुम्हें छतारमें दृश्य कोई कुँवारा