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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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३९ ओर दोनों चल पड़े। चलते-चलते जब वे बोहाके पास पहुँचे तब लोरिकने कहा— जरा माईसे भी मिलता चलूँ ! चन्दाने कहा—तुम माईसे मिलने जाओगे तो वे तुम्हें आने न देंगे। उनकी बात छोड़ो। लोरिक बोला—यदि तुम्हें चलना है तो मेरे साथ सीधे चलो। नहीं तो अपने पिताके घर लौट जाओ। निदान चन्दा लोरिकके पीछे-पीछे चली। इतनेमें पौ फटी और सँवरू जगा। जब उसे चन्दाके नूपुरोंकी ध्वनि सुनाई दी तब उसने ननुकुवा चरवाहेसे कहा— जरा देख तो कौन बनिया बैल लादे जा रहा है जिसकी घंटी और घुँघरूकी झंकार सुनाई दे रही है। बाहर जानकर ननुकुआने देखा पर उसे कोई दिखाई नहीं दिया। इतने में उसकी नजर लोरिकपर पड़ी और उसके पीछे चन्दा आती दिखाई पड़ी। यह देखकर वह दौड़ा और सँवरूसे बोला—गौरामैं कुशल नहीं जान पड़ती है। लोरिक चन्दाको भगाकर जा रहे हैं। उसीके ये नूपुर बज रहे हैं। इतनेमें लोरिक स्वयं आ पहुँचा और सँवरूको अपने बाहोंमें कस लिया और फिर बोला—मैंने बहुत बड़ी बुराई की है। चन्दाको भगाकर मैं हरदी बाजार जा रहा हूँ। इतना सुनकर सँवरूने कहा—तुम्हें कहीं जानेकी आवश्यकता नहीं। तुम यहाँ रहो मैं गौरामें रहूँगा। लोरिकने कहा—आप मुझे केवल आशीर्वाद दें ताकि कुशलतापूर्वक हरदी बाजार जाऊँ। वहाँ सिर्फ दस दिन रहूँगा। इतना सुनकर सँवरूने उसे आशीर्वाद दिया और लोरिक चन्दाके साथ हरदी बाजारकी ओर चल पड़ा। रात समाप्त हुई और सुबह जब मंजरीकी नींद टूटी और उसे अपना पति दिखाई नहीं पड़ा तो वह रोने लगी। इस प्रकार लोरिकके भाग जानेका समाचार सारे परिवारमें फैल गया। महागिनने आकर समझाया—तुम घबड़ाओ मत! मैं अपने पतिके पास बोहा ख़बर भेजती हूँ। वह लोरिकको तुरत पकड़ मँगायेंगे। वह चन्दाके साथ हरदी नहीं जाने पायेगा और काकाको बोहा भेजा। काका जब सँवरूके पास पहुँचे तो उनकी बात सुनकर सँवरूने बताया कि जाते समय वह मुझसे मिलकर और सारी बात बता कर गया है। दस दिनमें वह लौटकर आ जायेगा। काकाने लौटकर सबको शान्त किया और धीरज बँधाया। सहदेवके महलमें जब चन्दा गायब हो जानेकी खबर फैली तो वे अपनी बदनामीके भयसे शिथिल हो उठे। लेकिन क्या करते। चलते-चलते चन्दा और लोरिकने बक्सर पहुँचकर नदी पार किया और