भारतकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

पृष्ठ 424, कुल 520 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 424

बिहिया पहुँचे। उस समय पहर भर रात बीत चुकी थी। अत' वे एक पकड़ीके सूखे पेड़के नीचे रुक गये। लोरिकने कहा—चलते-चलते मैं थक गया हूँ जरा मैं सो लूँ। इतना कहकर वह वहीं चादर तानकर सो गया। सोते ही उसे गहरी नींद आ गयी। चन्दा भी वहीं पासमें बैठ रही और उसे भी नींद आ गयी। उस पकड़ीके पेड़के पास एक साँप रहता था। वह साँप अपनी बिलसे निकला और निकलकर उसने चन्दाको काट खाया। जब सुबह हुई और लोरिककी नींद टूटी तो वह उठा और चन्दाको जगाने लगा। लेकिन जब वह नहीं जागी तो उसने ध्यानसे देखा और पाया कि वह तो मर गयी है। वह रोने लगा। चन्दाके वियोगमें वह पागल हो उठा और खीझकर सूखी हुई पकड़ीके पेड़के चारों ओर घूम घूमकर उसे काटने लगा। आने जाने वाले लोगोंको उसकी यह अवस्था देखकर कौतूहल हुआ। वे उसके चारों ओर एकत्र हो गये और उससे इसका कारण पूछने लगे। लोरिक रो रोकर अपनी सारी बात कह सुनायी और कहा—इस लकड़ीकी चिता बनाऊँगा और अपनी पत्नीके साथ सती हो जाऊँगा। यह सुनकर लोग हँसने लगे। बोले—पागल हुए हो। स्त्रीको तो पुरुषके साथ सती होते देखा है लेकिन स्त्रीके साथ किसी पुरुषके सती होनेकी बात नहीं सुनी गयी। पेड़ पर एक साँप रहता है उसीने उसको काट लिया होगा। नगरमें बहुतसे गुनी हैं जा तुम जाकर पुकार करो। किसी गुनीके कानम आवाज पहुँचेगी तो वह साँप काटनेकी बात सुनकर दौड़ा आयेगा। लोरिकने नगरमें जाकर पुकार की। उसकी बात सुनकर गुनी लोग एकत्र हुए। उन्होंने दूध मँगाकर नादमें भरवा दिया और मन्त्र पढ़कर चिली कौड़ी फेंकी। चिली कौड़ी जाकर साँपके माथेमें चिपक गयी। साँप गुस्सेमें भरा पकड़ीसे निकलकर चन्दाके पास आया। उसे देखते ही लोरिक गरुड़ होकर मारने दौड़ा तो सांप बिलमें फिर घुस गया। गुनी लोगोंने तरह तरहके उपाय करने पर भी जब वह न निकला तब उन्होंने लोरिकसे कहा कि तुम्हारे डरसे साँप नहीं निकल रहा है। जब तक तुम यहाँ रहोगे, साँप यहाँ नहीं आयेगा। गमछा बुझाकर उन्होंने टस वहाँसे हटाया तब सांप बिलसे निकलकर चन्दाके पास गया और अपना सारा विष खींच लिया और विषका वमन छोड़कर पकड़ीके छेदमें चला गया। चन्दा रामका नाम लेती हुई उठ खड़ी हुई। लोरिकने गुनियोंके प्रति कृतज्ञता प्रकट की। लोरिक जब आगे चलनेको उद्यत हुआ तो चन्दाने कहा— इस बिहिया बाजारका राजा अन्यायी है। उसने चन्दैनिया नामक एक सुन्दर नगर छोड़ा है जो गढ़ पचनेके बराबर जान पड़ता है। इसलिए राजाका राज्य छोड़कर अन्यत्र चले जाना।