चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें११२ बड़ी तारीफ की। अब तो हम बिदिया बाजारके बीचसे ही चलेंगे। और गली-गली घूमेंगे और राज्यकी करतूत देखेंगे। चन्दाने समझाया-मेरा कहना मानो। महँसि लौट चलो। हमला हो जायेगा तो जो कुछ पैसा पासमें है वह सब लुट जायेगा और रास्तेका खर्च भी नहीं बचेगा। लोरिकने उत्तर दिया-मेरे बंधकी परम्परा ऐसी नहीं है। अगर हम किसी बगीचेकी बात सुन लेते हैं तो उसके पास आते हैं और दुर्गन्धकी बात होती है तो हम खुद कतरा जाते हैं। लोरिकके हठको समझ कर चन्दा बोली-अगर तुम नहीं मानते हो तो देखो समझना। मैं आगे-आगे चलती हूँ तुम जरा पीछे रुककर चलना। चन्दा चली। उसके नूपुरोंकी झंकार सुनकर रजवेनियाने उसकी ओर देखा और आकर रास्ता रोक दिया। बोला-बिदियाकी कौड़ी (कर) देकर जाओ। चन्दाने कहा-मैंने कोई गाड़ी नहीं लादी है। कौड़ी दूँ तो किस बातकी ! रजवेनिया बोला-बिदियामें तुम्हारे नूपुर बजते हुए जा रहे हैं। तो तुम्हें इनके बजनेकी कौड़ी देनी होगी। इतना सुनकर चन्दाने पैरोंसे नूपुरोंको उतार कर आँचलमें बाँध लिया। बोली-लो अब तुम्हारे बिदियामें नूपुर नहीं बजेंगे। और कहकर वह आगे बढ़ी। रजवेनिया फिर स्थान रोककर खड़ा हो गया और तरह-तरहकी बातें करनेके बाद उसने चन्दासे विवाह करनेका प्रस्ताव किया। उसकी बातें सुनकर चन्दाने उसे गालियाँ सुनायीं। गालियाँ सुनकर रजवेनिया क्रुद्ध हो गया और चन्दाकी ओर झपटा। तब चन्दाने पीछे मुड़कर देखा और लोरिकको इशारा किया। इशारा पाते ही लोरिक चन्दाके पास आ पहुँचा। उसने अपनी खाँड बाहर निकाल ली और वह रजवेनियाको मारने लगा। चन्दाने रोका और कहा कि इसकी दुर्गति करके ही छोड़ देना ठीक होगा। तदनुसार लोरिकने पास ही लगे भीलव (बेल) के पेड़से फल तोड़े और रजवेनियाके लम्बे लम्बे बालोंमें गूँथ दिये और फिर उसे घुमाना शुरू किया ! पक्के बेल के फल झूलकर उसके मुँहपर चोट करने लगे। जब लोरिकने देख लिया कि उसकी पूरी मरम्मत हो चुकी तो उसे छोड़ दिया। रजवेनिया भागा हुआ राजाके पास पहुँचा और अपनी दुर्व्यथाका हाल कह सुनाया। उसकी बात सुनते ही राजाने अपनी सेनाको लोरिकको घेर लेनेका आदेश दिया। लोरिकने जब रणभेरी सुनी तो चन्दाको एक शमीके वृक्षपर बैठाकर आप उनसे जूझनेके लिए आगे बढ़ा। देखते-देखते उसने सारी सेनाको काट गिराया! सेनाका विनाश देखकर राजा अपने हाथी पर भाग चला। लोरिकने दौड़कर उसे पकड़ लिया और रस्सीसे बाँध दिया। राजा हाथ जोड़ कर प्राणदान माँगने लगा। तब लोरिकने कर उठानेका वचन देने पर उसे छोड़ा और चन्दाको लेकर आगे बढ़ा।