चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१९३ आगे बढ़नेपर चन्दाने कहा—सड़कका रास्ता छोड़कर लोटौके रास्ते चलो । आगे सारंगपुर गाँव है, वहाँ महीपति नामक जुआरी रहता है, जिसके साथ तीन सौ साठ और जुआरी हैं । अगर उस रास्ते चलोगे तो वह तुम्हारा सारा धन जीत लेगा फिर हमारे पास रास्तेके खर्चका अभाव हो जायेगा । चन्दाकी बात सुनकर लोरिकने कहा—तुमने महीपति जुआरीका बखान किया । अब तो मैं जरूर उसका करतब देखूँगा । और वह महीपति जुआरीके घरके पास पहुँचा । जुआरियोंने उसे देखते ही घेर लिया और बोले—इस रास्ते जो भी आता है उसे एक दाव जुआ खेलना पड़ता है । अतः जुआ खेलकर ही आगे जा सकते हो । इतना सुनना था कि लोरिकने चन्दाको तो एक पेड़के नीचे बैठा दिया और स्वयं महीपतिके संग जुआ खेलने बैठ गया । खेलते खेलते लोरिक अपना सारा धन वस्त्र, हथियार सब कुछ हार गया । अन्तमें उसने चन्दाको ही दांवपर लगा दिया और उसे भी हार गया । तब महीपतिने पासेको एक ओर रखकर लोरिकसे कहा—अब मुँह क्या देखते हो । अपन रास्ते जाओ । और अपने आदमियोंसे कहा कि चन्दाको महलमें पहुँचा दो । जब महीपतिके आदमी चन्दाके पास पहुँचे और उससे लोरिकके हार जानेकी बात कही तो वह महीपतिके पास जाकर बोली—अभी एक दाव खेलनेके उपयुक्त मेरे गहने बचे हुए हैं । अतः तुम पहले मेरे साथ एक दाव खेलो । वह खेलने बैठ गयी । खेलते-खेलते उसने लोरिककी हारी हुई सभी चीज जीत ली और फिर महीपतिक्रा सब कुछ जीतकर सारंगपुर गाव भी जीत लिया । फिर लोरिकसे बोली—तुम्हारी इज्जत बच गयी । अब तत्काल हरदीके लिए चल दो । दोनों चल पड़े । उन्हें जाते देख महीपतिने अपने जुआरियोंको ललकारा कि जीती हुई स्त्री लिये जा रहा है । उसे मारकर छीन लो । यह सुनना था कि जुआरी लोरिकपर टूट पड़े । लोरिक भी उनसे गुथ गया और थोड़ी देरमें उन्हें मारकर समाप्त कर दिया । जुआरियोंको मारकर लोरिक चन्दाको लेकर आगे बढ़ा । चन्दाने आगे आनेवाले गांव कनकपुरको बतलाकर दूसरे रास्ते चलनेको कहा पर लोरिकने उसकी बातपर ध्यान नहीं दिया और चलता ही गया । जिस समय वे दोनों कनकपुरके निकट तालाबपर पहुँचे वे प्याससे व्याकुल हो रहे थे । वे तालाबमें घुसकर पानी पीने लगे । इतनेमें तालाबके पहरेदारोंने उन्हें देखा और तालाबको जूठा करनेके कारण उन्हें गाली देने लगे । गाली सुनकर लोरिकको गुस्सा आया और वह पहरेदारोंको मारने लगा । पहरेदार भागकर राजाके पास पहुँचे । राजाने लोरिकको परास्त करनेके लिए सेना भेजी । मगर लोरिकने सेनाको ही परास्त कर दिया । राजाने भागकर अपने घर में शरण ली ।