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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 427

११४ लोरिक अपने रास्ते चल पड़ा और हरदी पहुँचकर महीचन्दका पता लगाया। महीचन्दने उन दोनोंका बड़े प्रेमसे बेटी-दामादकी तरह स्वागत किया। चम्बाने लोरिकको दो अशर्फी देकर कहा कि रास्तेमें तुम्हें बहुत बहना पड़ा; बहुत थक गये हो। जाकर शराब पी आओ, सारी थकान मिट जायेगी। तब तक मैं भोजन तैयार करती हूँ। लोरिक अशर्फियाँ लेकर निकला। भट्ठियोंमें जाकर शराबका नमूना चखने लगा। पर उसे अपने मनके अनुकूल कहीं शराब न मिली। अन्तमें जमुनी कलवारिनके भट्ठीपर पहुँचा। जमुनी लोरिकको देखते ही उसके रूपपर मोहित हो गयी और उसके लिए विशेष रूपसे शराब तैयारकर चखनेको दिया। उसे चखते ही लोरिक प्रसन्न हो उठा। देखते-देखते वह बारह बोतल शराब पी गया। तब उसने जमुनीपर दृष्टि डाली। दोनोंकी आँखें चार हुईं और वह वहीं जमुनीके संग सो रहा। आधी रातको यकायक लोरिकके कानमें ताल ठोकनेकी आवाज सुनाई पड़ी। सुनकर उसने जमुनीसे उसके सम्बन्धमें पूछा। पहले तो जमुनीने बात टालनेकी चेष्टा की। पर जब लोरिक न माना तो उसने बताया कि हरदीमें एक बुढ़िया रहती है। उसके एक लड़का है। एक दिन जब राजा महुअर्री अपने हाथीपर बाजारमें घूम रहे थे तो उस लड़केने उनके हाथीकी पूँछ पकड़ ली और पीछेकी ओर खींचने लगा। पीलवान कितना भी अंकुश लगाता हाथी पीछे ही हटता जाता। यह देखकर राजाने उस लड़केको अपने हाथीपर चढ़ा लिया और उसका नाम गजभीमक रखा। उन्होंने उसके लिए खाने-पीनेकी पूरी व्यवस्था कर दी है और मासिक वेतन निश्चित कर दिया है। उसे उन्होंने गेड़ुआपुर अखाड़ेका सरदार बनाकर भेज दिया है। वहाँ वह रोज सौ पहलवानोंको पछाड़ता है। उसीने गेड़ुआपुर अखाड़ेमें सलामी दी है, उसीकी यह आवाज थी। यह सुनकर लोरिक बोला—यह भीमक कैसा वीर है जिसकी हरदीमें प्रशंसा होती है। जिस समय मैं अगोरीदामें विवाह करने गया था उस समय मैंने तीन सौ साठ हाथियोंकी सूँड़ फाड़ डाली; मगर किसीने मेरा नाम नहीं बदला। मुझे लोग बाप-दादे रखे नामसे लोरिक ही पुकारते रहे। और इसने हाथीकी पूँछ पकड़कर पछीह भर दिया तो उसका नाम 'गज भीमक' हो गया। सुबह हुई तो लोरिक महीचन्दके घर लौटा। चम्बा लोरिकको देखते ही सभ्रम हो गयी—ससुरकी सिंदूरकी उपेक्षा कर, सुलारमें जाकर मैं इन्हें यहाँ ले आयी और यहाँ आते ही हरदीमें मेरी सौत पैदा हो गयी। यह सोचते हुए उसने लोरिकका स्वागत किया। लोरिक मुँह-हाथ धोकर जलपान कर सो रहा। नगरमें जिस किसीने भी लोरिकको देखा वह स्तब्ध हो उठा। लोग जाकर राजा महुअरके कान भरने लगे कि महीचन्दने किसी शत्रुको अपने यहाँ लाकर रख छोड़ा है। राजाने तत्काल महीचन्दके पास टिके परदेशीको बुला लानेके लिए सिपाही भेजे। सिपाहियोंने आकर यह बात महीचन्दसे कही। लोरिकने जब यह बात सुनी तो