चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ ६ उसके सात सौ पहलवान गेरुवा नामक अखाड़ेमे कुश्ती लड़ा करते थे। गजभीमक उनका नायक था। वह अजेय समझा जाता था। राजाने लोरिकको बुलवाया और एक पत्र देकर उसे गजभीमकके पास भेजा। लोरिक पत्र ले जानेको तैयार हो गया। चनैनने राजाकी दुष्टतासे उसकी सवारीके लिये कटरा नामक प्रख्यात घोड़ेको चुना और उसपर सवार होकर लोरिक गजभीमकके पास चला। राजाने उस पत्रमें गजभीमकको आदेश दिया था कि पत्र देखते ही लोरिकको मार डालना। पर लोरिकको मारनेकी कौन कहे गजभीमक स्वयं लोरिकके हाथ अपने सात सौ पहलवानोंके साथ मारा गया! उस दिनसे मोचनि राजा लोरिकसे भयभीत रहने लगा और किसी प्रकार उसे मार डालनेकी फिक्रमें रहने लगा। इस बार उसने पत्र देकर लोरिकको हरेवा करेवाके पास भेजा। हरेवा-करेवा दो भाई थे और दोनों ही अत्यन्त अत्याचारी थे। उनके भयसे सारी प्रजा त्रस्त थी। लोरिक पत्र लेकर पहुँचा और मनविसुनीके मैदानमें उसकी हरेवा करेवासे लड़ाई शुरू हुई। युद्धमें पहले हरेवाका भागिनेय कोठा राघव का राजकुमार कुँवर अंगार मारा गया। पीछे लोरिकने हरेवा करेवाको भी अपने खड्गसे यमपुर पहुँचा दिया। वहॉँसे लौटकर लोरिकने राजा मोचनिको भी मार डाला। अब सोनहीघाटमें महल बनाकर लोरिक और चनैन सुखपूर्वक रहने लगे। चनैन राज-काज चलाने लगी। उधर लोरिकके वियोगमें उसकी पत्नी माँजरि सूखकर काँटा हो गयी। उसने गायोंको राजा कोल्हू मल्लवा छीन लेगया। उसके साथ लड़ते हुए लोरिकका भाई साँवर भी मारा गया और साँवरकी पत्नी भस्ममय देखकर सती होगयी। इस सब दुःखोंसे दुःखी होकर लोरिकके माता-पिता अन्धे हो गये। जब माँजरिने देखा कि उसका पति लौटकर नहीं आ रहा है तो उसने अपने पालतू कौवे—चाझिलके पैरमें पत्र बाँधकर लोरिकके पास भेजा। लोरिक पत्र पाकर घर लौटनेके लिये व्याकुल हो उठा और चनैनके लाख प्रतिरोध करनेपर भी उसे और अपने बेटे इन्द्रजीतको लेकर गौड़की ओर चल पड़ा। गौड़के निकट पहुँचकर लोरिक और चनैन दोनोंने अपना वेश बदल लिया और गौड़में अपना परिचय सलोनीके राजा-रानीके रूपमें दिया। चनैनके कहनेपर लोरिकके मनमें अपनी पत्नी माँजरिके प्रति संदेह जागा कि वह निश्चय ही अपना रूप सौन्दर्यमें बेचकर जीवन-यापन करती रही होगी। अतः अपने इस सन्देहकी पुष्टिके निमित्त उसने गाँव भरके दूधको खरीदनेकी योजना बना दी। फलतः गाँवकी सभी स्त्रियाँ उसके पास दूध बेचने आयीं। उनके साथ माँजरि भी आयी। चनैनने सब स्त्रियोंको तो दूधके मूल्यमें चावल दिये और माँजरिके दूध-पात्रको हीरे-मोतियोंसे भर दिये। चनैनने सोचा था कि हीरा-मोतियोंके प्रलोभनमें माँजरि पुनः आयेगी और उस राजा (लोरिक) की उपस्वामिनी बनना स्वीकार कर लेगी। किन्तु उसकी