चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंकिन्तु वह अपने पतिको अपनी ओर आकृष्ट करनेमें सफल न हो सकी। विवश होकर उसने इस प्रकारकी उपेक्षाका कारण पूछा। अपनी पत्नीके प्रश्नोंको सुनकर वह रोने लगा और रोते-रोते उसने अपनी काम-शक्तिहीनताकी बात कह सुनायी। तब चनैनने पूछा—ऐसी अवस्थामे मेरे उद्दाम यौवनका क्या होगा ? शिवधरने तत्काल किसी परपुरुषके संग जीवन व्यतीत करनेकी अनुमति दे दी। जब चनैन शिवधरके पाससे लौट रही थी तो रास्तेमें, गाँवके समीप ही, बण्ठा चमार मिल गया। वह उसके सौन्दर्यपर मुग्ध हो गया और उससे प्रणय निवेदन करने लगा। चनैनने उसे ठुकरा दिया तो वह बलात्कार करनेकी धमकी देने लगा। चनैनने इधर उधर देखा पर गाँव निकट होनेपर भी कोई आता-जाता दिखाई नहीं पड़ा जिसे वह अपनी सहायताके लिए पुकारती। इस संकटसे बचनेका उपाय वह सोच ही रही थी कि उसका ध्यान निकट ही खड़े एक अत्यन्त ऊँचे इमलीके वृक्षकी ओर गया। उसपर इमलीयोंके पके हुए गुच्छे लटक रहे थे। चनैनने कुछ सोचा और फिर मुस्कराकर बण्ठासे बोली—मुझे फुनगी (पेड़के सबसे ऊपरी भाग) पर लगी पकी इमलीयाँ खिलाओ। इतना सुनना था कि बण्ठा निशंक हो गया और बिना कुछ सोचे-समझे तत्काल अपनी पगड़ी और जूते उतार, मगन होता हुआ पेड़के सिरेपर चढ़ गया और इमली तोड़कर गिराने लगा। चनैनको अवसर मिला। उसने बण्ठाके जूते और पगड़ीको उठाकर दूर फेक दिया और स्वयं भाग निकली। जब तक बण्ठा पेड़से नीचे उतरकर अपनी पगड़ी और जूतेको सँभाले, तब तक चनैन महलमें जा पहुँची। निराश बण्ठा क्षुब्ध हो उठा और अगीरामें जाकर उत्पात मचाने लगा। लोरिकने उसे समझानेकी बहुत कोशिश की पर बण्ठा अपनी हरकतोंसे बाज नहीं आया। तब लोरिकने क्रुद्ध होकर उसे युद्धके लिये ललकारा। युद्धमें बण्ठा मारा गया। बण्ठाके मारे जानेकी खुशीमें चनैनने भोजका आयोजन किया और बण्ठाके विजेता लोरिकको विशेष रूपसे आमन्त्रित किया। जिस समय लोरिक भोजन कर रहा था ऊपरसे कुछ तिनके आकर उसकी पत्तलपर गिरे। लोरिकन आँख उठाकर ऊपर देखा। रूपसी चनैन अपने सत्तखण्डे महलके झरोखेपर खड़ी मुस्करा रही थी। उसे देखते ही लोरिक उसपर मुग्ध हो गया। दोनोंमें परस्पर कुछ सम्बत हुआ। तदनन्तर दोनों एक दूसरेसे छुप-छिपकर मिलने लगे। और एक दिन अंधेरी रातमें दोनों अपना गाँव छोड़कर भाग निकले और हरदीथान पहुँचे। हरदीधाम मौनगरके मौजनि राजाके राज्यम पड़ता था। वह राज्य अत्यन्त प्रतापी था। टिठरा नामक एक नाई उसका सेवक था। एक दिन अकस्मात् टिठरा नाईने चनैनको देख लिया। चनैनका रूप देखते ही वह मूच्छित हो गया। होश आनेपर वह मोपनि राजाके पास पहुँचा और बोला—एक आदमी लोरिक चनन्को चुराकर लाया है। आपकी सातो रानियाँ उस सुन्दर नाहुओंकी बावन भी नहीं हैं। यह सुनकर मंपनि राजाने चनैनको प्राप्त करनेके लिए षड्यन्त्र रचा।