चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४८ एक दिन दोनों एक साथ स्नान करने गये। जब राजा मन्जारने अपने कपड़े उतारे तो उनकी पीठपर चोटके बहुतसे निशान दिखाई पड़े। लोरिकने जब पूछा कि ये कैसे निशान हैं तो मन्जारने बताया कि जब कभी हरेशा-बरेशा इस ओर आते हैं तो मुझे चोट पहुँचाते हैं। ये निशान उसीके हैं। यह देखकर लोरिकने तत्काल प्रतिज्ञा की कि जबतक हरेशा-बरेशाको पकड़ न दूँगा तब तक इस गाँवका अन्न-जल ग्रहण न करूँगा। और तत्काल चलनेको प्रवृत्त हो गया। मन्जारने कहा—पैदल तुम कभी उसके पास पहुँच न सकोगे। और उसे एक घोड़ा दिया। उस घोड़ेपर सवार होकर लोरिक दूसरे दिन सूरज निकलते-निकलते नेठरपुर पहुँचा। हरेशा-बरेशा उस समय शिकारको गये थे। लेकिन उन्हें खोजता हुआ वहाँ जा पहुँचा। वहाँ वह उनसे भिड़ गया और उनके सभी साथियोंको मारडाला। तब उन दोनोंने अपनी सहायताके लिए अपने साझे कंगारको बुलाया। लोरिकन उसे भी परास्त कर दिया और हरेशा बरेशाको मार डाला। फिर लौटकर लोरिक हरदौनें चलाइनके साथ सुख पूर्वक रहने लगा। कनिंगहमने अपनी रिपोर्टमें सबसे आश्चर्यजनक बात यह लिखा है कि उन्हें इस बातके अतिरिक्त कि लोरिक व्यक्तिका अहिर था उसके सम्बन्धमें उस क्षेत्रसे और कोई बात ज्ञात न हो सकी। छत्तीसगढ़ी रूप छत्तीसगढ़में लोरिक और चन्दाकी कथा जिस रूपमें प्रचलित है, उसे वरियर एलविनने विलासपुर जिलेके कठघोड़ा तहसीलके धुरी जमींदारी अन्तर्गत सुनेरा ग्रामनिवासी घिचू अहीरसे सुनकर अपनी पुस्तक फोक सांग्स ऑव छत्तीस गढ़में दिया है।१ उनके अनुसार वह कथा इस प्रकार है— बाबनबीर नामक एक अहीर था जो बावन भैंसोंको दूहकर उनका दूध पीता था। एक दिन उसके मित्र राउतने कहा कि गौनेका दिन आ गया है जाकर अपनी स्त्री चन्दैनीको लिवा लाओ। बाबनबीरने उत्तर दिया कि मेरे सिरमें दर्द हो रहा है तुम मेरी कटार और घोड़ा ले लो और जाकर दुल्हनिको लिवा लाओ। राउत जाकर चन्दैनीको लिवा लाया और बाहरसे ही उसने बाबनबीरको आवाज दी। उस समय वह भात खा रहा था। भात खाकर उसने जो डकार ली तो उसकी आवाज बारह कोसतक सुनाई पड़ी। साना खाकर पेट सहलाता हुआ घरसे बाहर निकला और दूध दूहनेकी तैयारी करने लगा। चन्दैनीको यह देखकर आश्चर्य हुआ कि मैं ब्याही हूँ और मेरी ओर उसने तनिक भी ध्यान नहीं दिया। वह स्वयं उसके पास गयी। पहले उसने उसके पैरकी ओर देखा फिर उसके मुँहकी ओर और फिर उसके छाँतियेकी ओर। तत्काल घरमें जाकर पैर धोनेके लिए वह गरम पानी ले आयी। बाबनबीरने पानीमें जैसे ही पैर डाला वह जल १ ४१७१२००