चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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क। लोरिकने अपनी बात नवाबी। बठवाने तत्काल अपनी चमारिनको बुलवा भेजा। मेरी धूमो, इस रावतको जमीनमें इस तरह कसकर गाड़ दो कि वह कभी निकल न सके। मैं उसे ऐसा गाड़ूँगी कि वह कभी निकल ही न सके और तुम आकर उसे मार कर वीर कहाओ—चमारिन बोली और हाथ भरका एक खोंता ले आयी। गड्ढा खोदकर वह लोरिकको गाड़ने लगी। तब मनजरियाने चारों ओर अशर्फियाँ बिखेर दीं। लालची, चमारिन अपना काम छोड़कर उन्हें बटोरने लगी। इस बीच लोरिकने भीतर ही भीतर अपना पैर ढीला कर लिया। उधर मनजरियाने बठवाको खूब कसकर गाड़ा। फिर वहाँसे हटकर बोली—शत्रुको अब मारो। बठवाने गड्ढेसे बाहर आनेकी बहुत कोशिश की लेकिन एक तिल भी हट न सका। उधर लोरिक इतनी जोरसे उछला कि जमीनसे पाँच हाथ ऊपर चला गया। नीचे आकर उसने अपने लट्ठसे बठवाकी खूब मरम्मत की। इतना मारा कि उसकी लाठी टूट गयी। उसने दूसरी लाठी उठायी। तब बठवा हाथ जोड़कर कहने लगा—बस करो रावत, लंगड़ा लूला जैसा भी जीने भर दो। मैं तुम्हारा गौरागढ़ छोड़ दूँगा। तुम्हारी चम्पमें सेवा करूँगा। यह सुनकर मनजरियाने लोरिकको मारनेसे रोका और धूमोसे बोली—ले जा अपने पतिको अरण्डके पत्तोंसे सेंक कर। लोरिक और मनजरिया दोनों घर लौट आये। छिपे-छिपे चन्देनीने उन दोनों को आते देखा। वह मन ही मन कहने लगी—अरे नाथ मेरे देवता, तुम्हारी तरह का आदमी त्रिलोकमें नहीं है। वह दिन कब आयेगा जब मैं एक प्रेमिकाकी तरह तुम्हारे साथ भाग चलूँगी। और तब चन्देनी अपने भाई महन्तीसे बोली—लोरिकके आने जानेके रास्ते- में मेरे लिए एक झूला डाल दो। भाइने झूला डाल दिया। लोरिकने उस रास्तेमें आना ही बन्द कर दिया। दिन गिनते गिनते चन्देनीकी उँगलियाँ घिस गयी उसकी राह देखते-देखते आँखें थक गयी पर लारीक सिवा कुछ दिखाई न दिया। तब वह देवी देवताओंको मनाने लगी। एक दिन लोरिक अपने अखाड़ेसे उसी रास्ते अपने घर लौटा। उसे आते देख चन्देनी अपने झूलेपर बैठ गयी। बोली—कुछ झूल न झूल लोगे रावत ! ना ना—लोरिक बोला—अरे लोग सब देख रहे होंगे और हमीं बदनाम हो जाऊँगा। मेरी झूल न झूलोगे तो तुम्हें अपनी मा-बहनकी कसम। कसम सुनकर लोरिकको गुस्सा आ गया। उसने इतनी जोरसे झूला लगाया कि चन्देनी काफी दूर आसमानमें फेंका गयी और उल्काकी तरह नीचे गिरने लगी। उसने दस हाथ ऊँचे