चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंऔर मैं मर गयी । दूसरे जन्ममें कुतियाके गर्भमें जन्म लिया और मैं गली-गली भूँकती फिरती थी । फिर राजाने शाप दिया और मैं मर गयी। और अन्तम मैने राजा गोयन्थीके घर जन्म लिया और बीर बावनसे विवाही गयी किन्तु अपने सभी जन्मोंमें मैं कभी सुखी न रह सकी। यह सुनते ही लोरिक झरनपरसे उतर आया। चन्दैनीने इत्र फुलेलसे उसका स्वागत किया और मिठाई खिलायी। दूसरे दिन सुबह हल्ला हुआ—लोरिक कहाँ है, लोरिक कहाँ है आवाज सुनते ही वह जागा और खाटपरसे उठकर भागा। जल्दीमें उसने चन्दैनीकी साड़ी पहन ली। आँगनमें बुढ़िया धोबिन गुहारती हुई मिली। बोली—नन्दके लाल तुम कहाँ थे ! तुम्हारे गाल काजल और सेंदुरसे लाल क्यों हैं ? लोरिकने बहाना किया मै अपनी गाये ढूँढ रहा था। गेरूसे खेल रहा था वहीं मुँह पर लग गया होगा ! धोबिन बोली—अरे लबाड़िये, चुप रह। तेरी धोती कहाँ है ! चन्दैनीकी साड़ी क्यों पहने है ? लोरिकने अपने शरीर की ओर देखा और फिर गिड़गिड़ाने लगा—किसीसे मत कहना, तुझे दो सूप गेहूँ दूँगा। यह साड़ी, चन्दैनीके घर दे आओ। बुढ़िया साड़ी लेकर चन्दैनीके घर गयी। वहाँसे लोरिकके कपड़े ले आयी। लोरिक उन्हें नदी पर धोकर घर पहुँचा। उस समय मनजरिया घर बुहार रही थी। उसने देखते ही कहा—मैने कहा न था कि सभामें मत जाओ। ऐसी सभा तो पहले कभी नहीं होती थी। तुम्हारी आँखें उदास-सी क्यों हैं ! और वह बड़बड़ाती हुई घड़ा लेकर तालमकी ओर चली। तालब पर चन्दैनी अपने कपडे धो रही थी। उसे देखते ही चन्दैनीने पूछा— किसे कोस रही हो बहन। मनजरियान अपने पतिके आँखोंके उदासीकी चर्चा की। तब चन्दैनीने लोरिक के अपने घर आनेकी बात कह दी। बोली—वे घरके परनापर चढ गये और मुझे एक पल सोने नहीं दिया। और हँस पडी। मनजरियाको सन्देह हो गया। मर जा तू चन्देन—कोसती हुई मनजरिया घर आयी। लोरिकको बड़े प्रेमसे नहलाया फिर खाना खिलाया। खाना खाकर लोरिक सोया। शाम हुई तो उसे चन्दैनीकी याद आयी। गाँवकी गायोंको दुहनेके बहाने अपने कपड़े छिपाकर घरसे निकला। रास्तेमें बुढिया धोबिन मिली। बोली—इस रास्ते रोज-रोज मत आया करा नही तो बदनाम हो जाओगे। उसकी खिड़कीसे रस्सी बाँध लो उसीके सहारे बिना किसी के जाने आया-जाया करो। धोबिनके कहनेके अनुसार लोरिकने रस्सी तैयार की। मंजरीयाने रस्सी देख ली और जान गयी कि वह किस कामके लिए बनायी गयी है। उसने उसे कोठारम छिपा दिया। लोरिकने मजरियाकी खुशामद की और उसे मनाकर फिर रस्सी ले ली।