चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१४ रस्सी फेंककर लोरिक चन्दैनीकी खिड़कीके पास पहुँचा और रस्सी ऊपर फेंकी। चन्दैनीने उसे लौटा दिया। लोरिकने दुबारा रस्सी फेंकी। चन्दैनीने फिर लौटा दिया। जब चन्दैनीने इस तरह तीन बार रस्सी लौटा दिया तो लोरिक ने चिल्लाकर कहा— यदि इस बार रस्सी नहीं पकड़ोगी तो मैं अपना सिर काट लूँगा। चन्दैनी डर गयी और उसने कमन्द फेंक आने दिया। लोरिक कूदलेते ऊपर उसके कमरेमें आ गया। दोनों प्रणय प्रलाप करने लगे। अन्तमें दोनोंने नगर छोड़कर भाग चलनेका निश्चय किया। उस रात भी लोरिक देर तक सोता रह गया और लोक- ढूँढ़ होनेपर जल्दी-जल्दी उठकर भागा। जल्दीमें सिर चन्दैनीकी साड़ी पहन ली और धोबिनने उसे देख लिया और लोकापवादसे बचाया। चन्दैनी घर छोड़कर भागनेका मुहूर्त पूछने ब्राह्मणके घर गयी। ब्राह्मणने मंगलवारका दिन उपयुक्त बताया। तदनुसार चन्दैनी मंगलवारको भागनेके लिए निर्धारित स्थानपर गयी पर लोरिक नहीं आया। वह सोचती हुई कि अब मैं उससे कभी न बोलूँगी घर आयी। वहाँ उसने लोरिकको अपने खाटपर सोता पाया। चन्दैनी से उसने कहा—मैंने गाँजा अधिक पी लिया था। इससे समयपर ध्यान न रहा। अब धोखा न होगा। दूसरी रात भी लोरिक न आया। इस प्रकार नित्य चन्दैनी भागनेकी तैयारी करती पर लोरिक न आता। अतः एक दिन रातमें चन्दैनी गलेमें घंटी बाँधकर लोरिकके घर पहुँची और घरके बाहर छप्परपर फैली बेलको खींचा। उसके गलेकी घंटी बज उठी। ऐसा लगा जैसे किसी गायने बेल खींची हो और उसके गलेमें घंटी बजी हो। मँझरियाने आवाज सुनी। वह भीतरसे ही चिल्लाई। चन्दैनी थक गयी और फिर कसकर घंटी बजाने लगी। सोचा था मँझरिया गायके भगानेके लिए लोरिकको जगायेगी पर वह खुद ही निकल आयी। चन्दैनीको देखकर उसे पीटने लगी और दूर तक खदेड़ आयी। थोड़ी देर बाद फिर चन्दैनी देवी-देवताओंको मनाती आयी। देखा लोरिक मँझरियाकी जाँघपर सिर रखकर सोया हुआ है। उसे धीरेसे जगाया। लोरिकने कहा—हाँ आज भाग चलेंगे। और धीरेसे एक कम्बल और लाठी उठाकर चलने लगा। अब चन्दैनीकी बारी थी। बोली—मैं तुम्हारे साथ नहीं चालूंगी। तुम किसी के हाथ बेच दोगे किसी नातेमें मुझे दबोच दोगे, या किसी चरवाहेको दे दोगे। जानती हूँ मैं खूबसूरत हूँ, तुम किसीके हाथ बेच दोगे। किसी दूर देशमें बेच दोगे। मैं तुम्हारे साथ तभी चलूँगी, जब तुम अपने सब कपड़े लेकर मेरे साथ सदाके लिए निकल पड़ो। पश्चात् लोरिक अपने सब कपड़े लेकर चलनेको तैयार हो गया और बोला—हम लोग गढ़ हरदी चलेंगे। चन्दैनी बोली—मैं तुम्हारे साथ तबतक नहीं चल सकती जबतक तुम्हारा पौरुष न देख लूँ।