चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१५ तब लोरिकने अपनी तलवारसे पेड़की एक डाल काट गिराया। इसपर चन्दैनी ने ताना दिया—बस यही तुम्हारी बहादुरी है। यह सुनकर लोरिक क्रुद्ध हो गया। पासमें ही बाप दादोंका लगाया सेमरका पेड़ था। वह इतना मोटा था कि उसके चारों ओर बारह बैलोंकी रस्सी भी पूरी नहीं पड़ती थी। उसने अपनी तलवार तेज की और पेड़पर एक हाथ मारा। पेड़ जहाँका तहाँ लगा रहा। चन्दैनी हँस पड़ी। लोरिकने डाँटा—चुप रहो। करीब जाकर तो देखो तो तुम्हारे पागल प्रेमीने क्या किया है ! चन्दैनीके छूते ही पेड़ जमीनपर गिर पड़ा। चन्दैनी चलनेको तैयार हो गयी। तब लोरिक बोला—मैं चोरोंकी तरह नहीं चलूँगा। तुम्हारे बापसे कहकर चलूँगा। वह चन्दैनीके घर जाकर जोरसे चिल्लाया—राब्ध गवारि सोते हो या जागते ? मैं चार दिनके लिए बाहर जा रहा हूँ। मजरियाको तुम्हारे ऊपर छोड़े जाता हूँ। ऐसा कहकर चल पड़ा। भीतरसे आवाज आयी—मेरी बीबीको भी लेते आओ, बहुत दिनोंसे उसने अपने माँ-बापको नहीं देखा है। लोरिक बोला—नहीं, नहीं। बुढ़ापेमें वह चलते-चलते मर जायेगी। हाँ, मैं तुम्हारी बछिया साथ लिये जा रहा हूँ। और कहकर वह चल पड़ा। आगे-आगे लोरिक पीछे-पीछे चन्दैनी चली। चलते-चलते वे गेरू नदीके किनारे पहुँचे। नदीमें जोरोंकी बाढ़ थी। लोरिक पहाड़से सेमरका पेड़ काट लाया और बाँधकर बेड़ा बनाया। दोनों उसपर सवार होकर नदी पार करने लगे। नदीमें लोरिकको दो चूहे बहते दिखाइ पड़े। उसने उन दोनोंको उठाकर कन्धोपर रख दिया। रास्तेमें चन्दैनीने चुहियाको उठाकर मिखवाडमें किनारे नहाती हुई स्त्रियोंपर फेंक दिया। यह देखकर चूहेको गुस्सा आया और उसने बेड़ेकी रस्सी काट दी। लोरिक और चन्दा बहने लगे। बहते बहते वे किसी तरह किनारे आ लगे। वे दोनों केवटको खोजने लगे जो उन्हें नावपर बैठाकर पार कर दे। एक केवट मिला मगर वह चन्दैनीके रूपपर मोहित हो गया। उछलकर लोरिक और चन्दैनी उसकी नावपर चढ़ गये। नावपर चढ़कर लोरिकने केवटका कान काट लिया। नदी पार करनेके बाद चन्दैनीने केवटको अपनी साड़ी दी और कहा इसे अपनी बीबीको पहनाना। पहनकर वह भी मेरी ही तरह सुन्दर लगने लगेगी। चन्दैनी अपने प्रेमीके साथ भाग गयी इसकी खबर जब बावनबीरको लगी तो वह लोरिकको पकड़ने निकला। दूरसे लोरिकने उसे नदीके किनारे-किनारे आते देखा। उसने चन्दैनीसे छिप जानेको कहा और स्वयं मन्दिरकी ओर चल पड़ा। बावन बीरने तीर चलाया पर उसका निशाना चूक गया। उसने बारह नीमके पेड़ काटकर मन्दिरपर गिराये। मगर लोरिक बचकर मन्दिरसे निकलकर आगे चल पड़ा। बावनबीर नदी पारकर आया और मंदिरको तोड़ डाला। मगर उसे शत्रु न मिला। वह तो निकल चुका था।