चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४१६ अब चन्दैनीके मनमें भाव उठने लगा—यदि हम भोगरैने नदी पर न ही होती तो दोनोंमें लड़ाई होती। मैं एकको पराजित होकर बाढ़में बह जाते देखती और जो विजयी होता उसकी गोदमें सोती। जब लोरिकको चन्दैनीके मनकी बात ज्ञात हुई तो वह बहुत गुस्सा हुआ और उसने चन्दैनीको एक चांटा मार दिया। चन्दैनी लगी उसे गालियों और शाप देने—तुझे काला नाग डस ले। आगे जाकर वे लोग एक जगह रुक गये। चन्दैनीने खाना बनानेके लिए आग जलायी। लोरिक उसके पास ही लेट गया। इतनेमें चूल्हेसे एक चिनगारी उठी और नाग बनकर उसने लोरिकको डस लिया। जब वह खाना पका चुकी तो लोरिकको जगाने लगी। लेकिन वह तो मर चुका था। लगी वह जोर-जोरसे रोने। उसी रास्ते महादेव-पार्वती जा रहे थे। चन्दैनीका रोना महादेवसे न देखा गया। उन्होंने अपनी अँगूठी पानीमें धोकर लोरिकके मुँहमें डाल दी और वह जीवित हो उठा। वे लोग आगे बढ़े और चलते-चलते कोरियागढ़ पहुँचे। वहाँ वे एक तालाबके किनारे खाना पकाने लगे। धुँवाँ निकलते देख धनिआ नामक एक बदमाश वहाँ आया और बोला—मेरा कर दे तो हम खाना पकाने दूँगा। चन्दैनीको देखकर वह मोहित हो गया था; कहने लगा—मैं पैसे नहीं लूँगा तुम दोनोंमें से एकको लूँगा। लोरिकने कहा—अच्छा चन्दैनीको ले जाओ। जब धनिआ चन्दैनीको पकड़ने बढ़ा तो लोरिकने उसे पकड़ लिया और उसके सिरको तीन पौंतोंमें मूंड दिया और लगा बेलके फलोंसे उसे मारने। मार खाते-खाते जब धनिआ पागल हो गया तब उसकी तीनों जटोंमें लोरिकने एक-एक फल थाम दिया और भाग जानेको कहा। नगरके लोगोंने जब धनिआको आते देखा तो उन्होंने अपने-अपने दरवाजे बन्द कर लिये। रास्तेमें एक बुढ़िया अपने दरवाजेपर खड़ी रह गयी। उसके दरवाजेपर जाकर धनिआ बोला—अब मैं पागल धनिआ नहीं रहा। मैं साधू हो गया हूँ। तीर्थ करने गया था। उसने अपनी जटा और उसमें बँधे बेलके फलोंको दिखाया। बुढ़ियाने उसके फल निकाल फेंके। वहाँ बैठकर धनिआ चन्दैनीका सौन्दर्यका वर्णन करने लगा। बोला—उसके आगे तो हमारे यहाँकी रानी दासी सी लगती हैं। उसके पैर इतने कोमल और ऐसे लाल हैं, जैसे रानीकी जीभ हो। आगकी तरह उसका सौन्दर्य दमकता रहता है। जाकर राजासे कहो कि वह लोरिकको मार कर उस पद्मिनीको अपनी रानी बनावे। बुढ़ियाने राजासे जाकर कहा। राजाने उन दोनों पहलवानोंको बुलानेकी आज्ञा दी जो नित्य पाँच सेर गेहूँ और एक बकरा खाते थे। जब वे आये तो बोला कि उस आदमीको मारकर चन्दैनीको मेरे पास लाओ। दोनों पहलवान लोरिककी ओर चले। उन्हें आते देख चन्दैनी डरी। पर लोरिकने कहा—डरो मत। ये तो मेरे लिए खिलौने समान हैं। पास आते ही उन्हें उसने कोछल और गल्फे मार भगाया।