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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 453

४१८ मंजरियाने सम्ना बनजाराके लोरिकके पास सन्देश भेजा—उसके मकानमें आग लग गयी। उसके सब कबूतर जल मरे। उसके सब बाद्य यन्त्र नष्ट-भ्रष्ट हो गये। मेरा शरीर भी झुलस गया है। तुम दूसरेकी बीवीके साथ भाग गये हो। दूसरे बीवीको तो तुम उपहार देते हो और यहाँ तुम्हारी बीवी दूसरोंके अनाज साफ़ करती फिरती है। उसे शाम भोजनपर भी काम नहीं मिलता। शहरमें उसकी माँ मोथा इकट्ठीका काम करती है। सारी गायें छिन गयीं हैं भाई सब लड़ते झगड़ते मर गये। यह सब तुम जाकर, नायक, उनसे कहना। न कहोगे तो तुम्हें बारह गौ की हत्या। नायकने विश्वास दिलाया कि भैंससे गाड़ी उतारनेके पहले हम तुम्हारा सन्देश कहेंगे। नायकने हरदीगढ पहुँचकर लोरिकके निवास स्थानका पता लगाया। चन्दैनी ने जब यह सुना तो डरी और चुपकेसे नायकको अपने पास बुलाया और उसे गाली देते हुए बोली—मंजरियाका तुम सन्देश लाये हो। और उसकी नाकपर ऐसा घूँसा मारा कि उसकी नाक टूट गयी। फिर अपने शरीरपर दही पोतकर बैठ गयी। नौ शत बिल्लियाँ आकर उसका शरीर चाटने लगीं और फिर परस्पर लड़ने भी लगीं। जिससे उसके सारे शरीरमें खरोंच लग गये और रक्त निकल आया। दोपहरको जब लोरिक लौटकर आया तो चन्दैनीने उससे शिकायत की कि एक नायकने आकर मुझपर बलात्कार करनेकी चेष्टा की थी। लोरिक सुनते ही गुस्सेसे आग बबूला हो गया और लाठी लेकर वह नायकको ढूँढ़ने निकला। नायक अपने डेरेपर नहीं मिला। वहाँ उसकी बीबी थी। उसने लोरिक को गुस्सेमें देखकर बताया—मंजरियाने सन्देश भेजा था। वही कहने नायक तुम्हारे घर गया था। वहाँ तुम्हारी बीबीने उसकी नाक तोड़ दी। यह सुनकर लोरिक बहुत दुखी हुआ। नायकके घावको उसने सेंका और उसके नाक बिठलानेमें उसकी सहायताकी और फिर उससे कहा कि जल्दीसे जल्दी मुझे अपने देश ले चलो। इस प्रकार लोरिक नायकके साथ गौरागढ लौटकर आया। नगरमें पहुँचकर उसने अपनी पत्नीको घर-घर दही बेचते देखा। मंजरियाने उसे न पहचानकर कहा—गहक, मेरी दही ले लो। यह देख वह इतना दुखी हुआ कि कुछ कह न सका और लटकर चला गया। जाते समय वह अपने डेरेसे बाहर अपना डंडा छोड़ गया। लोरिककी छोटी बहन जब उस रास्तेसे निकली तो उसने उस डण्डेको देखा। देखते ही चिल्ला उठी—यह तो मेरे भइयाका डण्डा है। इसीसे वह गौओंको हाँक करते थे। फिर नायकसे पूछा—तुम्हें यह डंडा कहाँ मिला। जब मंजरियाने सुना तो वह भी दौड़ी आयी और उस डण्डेसे लिपट गयी। इतनेमें चन्दैनी डेरेसे बाहर आयी। मंजरियाने उसे देखते ही पहचान लिया और डंडा छोड़कर उसके बाल पकड़ लिए और उसे जमीनपर पटक दिया और गभी