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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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४२१ रहा। निदान वह थककी मारी टोकरी लेकर खेतपर पहुँची और टोकरी उतारनेमें सहायता करनेके लिए उसने अपनी ननद चोरिन्दिनीको पुकारा। चोरिन्दिनीने उसकी बात अनसुनी कर दी। चन्देनीने किसी किसी तरह अपने सिरका बोझ अपने आप नीचे उतारकर रखा। फिर वह अपने पतिको पुकारने लगी कि वह आकर खाना ले जाये, मगर उसने भी अनसुनी कर दी। अब चन्देनी पुकारते पुकारते थक गयी और सहदेव ग्वाला न आया तो उसे भी गुस्सा आया और वह खानेकी टोकरी लेकर घर लौट आयी। घरमें टोकरी रखकर वह मायकेकी ओर चल पड़ी। पहलेकी तरह ही फिर सहदेवने उमड़ती हुई नदी रास्तेमें खड़ी कर दी। इस बार चन्देनीने नदीसे प्रार्थना की कि वह सूख जाय और वह पार चली जाय। नदीने उसकी प्रार्थना सुन ली। रास्ता सूख गया और वह नदी पार गयी। दूसरी ओर तटपर पहुँचकर देखा कि एक युवक वहाँ बैठा उसकी प्रतीक्षा कर रहा है। उस युवकका नाम था धनुमुण्डा। उसने चन्देनीको देखते ही कहा—मैं तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा था। चलो मैं तुम्हें अपनी पत्नी बनाऊँगा। चन्देनीने मुँह बिगाड़कर कहा—मैं किसी डोम चमारकी पत्नी नहीं बनूँगी। यह कहकर वह भाग चली और भागकर अपने मायके जा पहुँची। धनुमुण्डा भी उसका पीछा करता हुआ पहुँचा और तालाबके घाटपर जा बैठा। जो कोई पानी भरने आता उसे वह वहीं मार डालता। जब यह बात राजा तक पहुँची तो उसने घोषणा कर दी कि जो कोई धनुमुण्डाको मार गिरायेगा उसे मैं अपना आधा राज्य दे दूँगा और उससे अपनी बेटीकी शादी कर दूँगा। यह सुनकर बीर बाटा सामने आया और वह धनुमुण्डासे तीन दिन तीन रात लड़ता रहा पर जीत न सका और मारा गया। तब बीरखुरी धनुमुण्डासे लड़ने आया और वह सात दिन सात रात लड़ता रहा। अन्तमें धनुमुण्डा मारा गया। राजाने अपने वचनके अनुसार बीरखुरीके साथ चन्देनीकी शादी कर दी और चन्देनीको लेकर बीरखुरी अपने घर चल पड़ा। रास्तेमें उसे अपनी पत्नीको खोजते हुए आता सहदेव ग्वाला मिला। सहदेव ग्वालाने उनके रास्तेमें उमड़ती हुई नदी खड़ी कर दी और वे दोनों रुक गये। तब सहदेवने बीरखुरीसे कहा—अगर तुम चन्देनीको अपने कन्धेपर बैठाकर पार चल जाओ और उसका तलुआ न भीगने पाये तो वह तुम्हारी हो जायगी। अगर नहीं कर सकोगे तो वह मेरी पत्नी है मेरी ही होकर रहेगी। बीरखुरी राजी हो गया। उसने चन्देनीको बिना भिगाये पार ले जानेके अनेक प्रयत्न किये पर पानीकी धार इतनी तेज थी कि वह सफल न हो सका। निदान हारकर उसने चन्देनीको छोड़ दिया और सहदेव ग्वाला उसे अपने घर लिवा ले गया। •