चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१६ चन्दायणसे सबसे अधिक प्रभावित पदमावत है। पदमावतकी कथाका उत्तरार्ध जिसे रामचन्द्रशुक्ल एवं कुछ विद्वान् ऐतिहासिक समझते रहे हैं वस्तुतः चन्दायतकी कथाका ही पूर्वार्ध है। नामोंको बदल कर जायसीने उसे अधिकृत रूपसे आत्मसात कर लिया है। चन्दायतमें चाँदको झरोखेपर छबी देखकर बासिर मूर्च्छित होता है और वह आकर रूपचन्दसे उसके रूप सौन्दर्यकी प्रशंसा करता है। उसे सुनकर रूपचन्द गोवरपर आक्रमण करता है। ठीक यही कथा पदमावतकी भी है। इसमें बासिर, चाँद और रूपचन्दके स्थानपर क्रमशः राघव चेतन, पदमावती और अलाउद्दीनका नाम दिया गया है। जिस ढंगसे दाऊदने चाँदका रूप वर्णन किया है ठीक उसी ढंगसे जायसीने पदमावतीका किया है। आगे किस प्रकार सहदेव महर, भोजका आयोजन करते हैं और उसका किस विस्तारके साथ दाऊदने वर्णन किया है ठीक उसी प्रकार हम रतनसेनका भी पदमावतमे भोजका आयोजन करते पाते हैं और उसी विस्तारके साथ जायसीने उसका वर्णन किया है। चाँदके रूप-दर्शनके बाद लोरक बीमार बनकर खाटपर पड़ा रहता है ठीक उसी दशामें हम पदमावतमें पदमावतीके रूप श्रवणके बाद रतनसेनको पाते हैं। चाँदकी प्राप्तिके लिए लोरक योगी बनता है उसी तरह पद्मावतीकी प्राप्तिके लिये रतन सेन भी योगीका रूप धारण करता है। चाँदका लोरककी प्राप्तिके निमित्त और पद्मावतीका रतनसेनके समागमकी प्राप्तिके लिय देव-दर्शनको व्यथा एक-सी घटनाएँ हैं। चन्दायत और पदमावतकी कथाओंमें इसी तरहकी और बहुत सी कथानक सम्बन्धी समानताएँ हैं। ये अद्भुत समानताएँ यह सोचने और कहनेको विवश करती हैं कि जायसी चन्दायतसे पूर्णतः परिचित थे। वे परिचित ही नहीं थे उन्होंने अपनी काव्य रचनामें उसका मुक्त रूपसे उपयोग भी किया है। इस धारणाको इस बातसे और भी बल मिलता है कि पदे पदे पदमावतके वर्णनांश चन्दायतके साथ अत्यधिक भाव-साम्य है। उसके कुछ नमूने इन पंक्तियोंमें देखे जा सकते हैं : चन्दायत \hspace{3cm} पदमावत सिरजसि छाँह सींहु औं सूरा । १।५ \hspace{1cm} कीन्हेसि धूप छाँह औं घामीँ । १।६ पुरुख एक सिरजसि बजियारा। \hspace{1.5cm} कीन्हेसि पुरुष एक निरमरा । नाउँ मुहम्मद जगत पियारा ॥ १।१ \hspace{1.1cm} नाउँ मुहम्मद पूजिव करा ॥ १।११ घडव सिंघ एक पँथहिं रँगाय । \hspace{1.5cm} गढव सिंह रंगहि भुइ बाहहि । भुइ पाट छुहुँ पानि पियारे ॥११।७ \hspace{0.9cm} पुहुप पानि पियाहिं भुइ बाहा ॥ १५।५ एक बाट रानी हुवई \hspace{2.5cm} एक बाट सो सिंघल दोसर रानी महारि । ४११।२ \hspace{1.7cm} दोसर कंक गंभीर ॥ १५ १८