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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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सम्पादन विधि

  • प्रस्तुत सम्पादन कार्यमें प्रत्येक कड़वकको अङ्कबद्ध कर पाठ-क्रम निर्धारित किया गया है। जहाँ कहीं किसी कड़वकका अभाव जान पड़ा उसका अङ्क छोड़ दिया गया। जिन कड़वकोंको पूर्वापरके अभावमें क्रमबद्ध करना सम्भव न हो सका, उन्हें सम्भावित स्थानपर बिना किसी प्रक्रम-संख्याके रख दिया गया है।
  • प्रत्येक कड़वक-संख्याके नीचे उस प्रति अथवा प्रतियोंका नाम और पृष्ठ दिया गया है जिससे वह कड़वक उपलब्ध है। जिस प्रतिका पाठ ग्रहण किया गया है, उस प्रतिका नाम पहले अन्य प्रतियों का बादमें रखा गया है।
  • तदनन्तर अनुवाद सहित कड़वकका फारसी शीर्षक दिया गया है। शीर्षक भी उसी प्रतिसे दिया गया है, जिसका पाठ ग्रहण किया गया है। अन्य प्रतियों के शीर्षक पाठान्तरके अन्तर्गत दिये गये हैं। यदि शीर्षक कड़वकके विषयसे भिन्न अथवा भ्रामक है तो उसका संकेत टिप्पणीके अन्तर्गत कर दिया गया है।
  • मुख्य-पाठ किसी एक प्रतिसे लिया गया है। जिस प्रतिसे पाठ लिया गया है उसका उल्लेख कड़वकके ऊपर पहले किया गया है। अन्य प्रतियोंके पाठान्तर नीचे दिये गये हैं।
  • प्रतियोंके लिपि-दोषको ध्यानमें रखते हुए विवेकके सहारे पाठ सम्पादन किया गया है।
  • पाठ सम्पादन करते समय मात्राओंके सम्बन्धमें निम्नलिखित सिद्धान्त ग्रहण किये गये हैं— (क) इ, ए और ऐ की मात्राएँ वहीं दी गयी हैं जहाँ ये (छोटी या बड़ी) रूपमें आ सका है। (ख) मात्रा-चिह्नोंके अभावमें इ और उ की मात्राओंको शब्द-रूप और प्रयोगके अनुसार अपनाया गया है। (ग) वाव को प्रसङ्गवश उ, ओ और औ की मात्राके रूपमें ग्रहण किया गया है।
  • पाठोंके सम्बन्धमें निम्नलिखित तथ्य उल्लेखनीय हैं— (क) नुस्खोंके अभावमें जहाँ किसी शब्दके एकसे अधिक पाठ सम्भव हैं, वहाँ उपयुक्त अथवा अर्थ-सङ्गत पाठ ग्रहण किया गया है। जहाँ आवश्यक जान पड़ा, वहाँ अन्य सम्भव पाठोंका भी टिप्पणीके अन्तर्गत दे दिया गया है।