चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७७ चाँद और मैनाका मन्दिर-गमन— २५०—पण्डितका चाँदसे देव-पूजा करनेको कहना २५१—देव पूजाके किये नाना जातिकी स्त्रियोंका आना २५२—सहेलियोंके साथ चाँदका मन्दिर जाना २५३— चाँदका मन्दिर प्रवेश २५४—चाँदका पूजा करना और मनौती मानना २५५— मैनाका सहेलियोंके साथ मन्दिरम आना और पूजा करना । चाँद-मैना संग्राम— २५६—चाँदका मैनासे उदासीका कारण पूछना; २५७—मैनाका छोभ मय उत्तर देना २५८—चाँदका प्रत्युत्तर २५९—मैनाका चाँदको उत्तर, २६०—चाँदका मैनाको गाली २६१—मैनाका चाँदके अभिसारकी बात प्रकट करना २६२— चाँदका उत्तर, २६३—मैनाका प्रत्युत्तर २६४—चाँदका उत्तर, २६५—मैनाका प्रत्युत्तर २६६—चाँद मैनाम हाथापायी २६७—चाँद मैनामे गुत्थमगुत्थी २६८—दोनोंका रक्तरंजित होना २६९—युद्धसे मन्दिरके देवताकी परेशानी २७०—लोरकका आना और स्थितिसे परिचित होना २७१—लोरकका मैना चाँदका अलग करना । महरिसे चाँदकी शिकायत— २७२—चाँदका मन्दिरसे घर लौटना २७३—मैनाका मन्दिरसे घर आना २७४— धोबिनका मैनासे मन्दिरकी घटना पूछना २७५—मैनाका मालिनको बुला कर महरिके पास शिकायत भेजना २७६—मालिनका महरिके पास जाना २७७— मालिनका महरिसे चाँदकी शिकायत करना २७८—चाँदकी नादानी पर महरिका शम्कित होना । लोरक-चाँदका गोवर छोड़नेकी तैयारी— ७ —चादका बिरस्पतको लोरकके पास भेजना; २८ —बिरस्पतका लोरकसे चादका सन्देश कहना; २८१—बिरस्पतका लोरकको समझाना; २८७—बिरस्पतका चाँदके पास वापस आना २८८—लोरक चाँदका साथ चलनेका निश्चय करना; २८९—लोरकका यात्राका मुहूर्त पूछना २९ —ब्राह्मणका मुहूर्त बताना २९१— चाँदका महलसे निकलना २९२—चांद लोरकका गोवरसे प्रस्थान २९३—उनस काले वस्त्र पहन आगे बढ़ना २९४—मैनाका सुधनी होना । कुँवरस भेंट— २९५—कुँवरका मागमे लोरकको पहचानना २९६—चाँदका कुँवरस अपने प्रेम की बात कहना २९७—कुँवरका चाँदकी भर्त्सना करना २९८—लोरकका कुँवरसे मिलकर आगे बढ़ना । लोरक-चाँदका गंगा पार करना— २९९—शामकाल लोरक चाँदका वृक्षके नीचे सोना ३०४—दोनोका गंगा तट