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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

DevanagariAwadhipublished520 पृष्ठ

७ इससे भी प्रकट होता है कि सत्रहवीं शतीके आरम्भमें चन्दायनी कथा लोक प्रिय थी। वैयक्तिक स्पष्टीकरण ग्रन्थमें सर्वत्र मैंने विद्वानोंका उल्लेख सीधे-सीधे नाम लेकर किया है अर्थात् उनके नामके आगे पीछे श्री, डाक्टर आदि सींग पूंछोंका प्रयोग नहीं किया है। मेरा यह भाव पाश्चात्यानुकरण है। वहाँ ग्रन्थोंमें विद्वानोंके विचार आदिका उल्लेख करते समय बिना किसी औपचारिकताके केवल नाम लिया जाता है। हम भी तुलसी, सूरदास आदि मनीषियोंके नामके साथ यही करते आ रहे हैं। उसी परम्परामें मेरा यह व्यवहार भी है। पाठक इसे मेरी धृष्टता और अविनयन समझनेकी भूल न कर बैठें, इसलिए इस स्पष्टीकरणकी आवश्यकता हुई। परमेश्वरीलाल गुप्त पटना संग्रहालय पटना-१। विजयादशमी, सन् १९६३ ई

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