भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 120, कुल 978 में से

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पृष्ठ 120
११६छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय १

तमेवमुक्तवन्तं ह प्रवाहणो जैविलिरुवाचान्तवद्वै किल ते शालावत्य सामत्यादि पूर्ववत् । ततः शालावत्य आह—हन्ताहमेतद्भगवतो वेदानीति विद्धीति होवाच ॥ ८ ॥इस प्रकार कहनेवाले उस शालावत्यके प्रति जीवळके पुत्र प्रवाहणने 'हे शालावत्य ! तुम्हारा साम निश्चय ही अन्तवान् है' इत्यादि पूर्ववत् कहा। तब शालावत्यने कहा—'मैं इसे श्रीमान्‌से जानना चाहता हूँ।' तब दूसरे (प्रवाहण) ने कहा—'जान लो' ॥ ८ ॥

इतिच्छान्दोग्योपनिषदि प्रथमाध्याये अष्टमखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ८ ॥

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