छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ें( ९ )
तृतीय खण्ड
१९. आदित्यदृष्टिसे उद्गीथोपासना .... .... ६४
२०. सूर्य और प्राणकी समानता तथा प्राणदृष्टिसे उद्गीथोपासना .... .... ६५
२१. व्यानदृष्टिसे उद्गीथोपासना .... .... ६७
२२. व्यानप्रयुक्त होनेसे वाक्, ऋक्, साम और उद्गीथकी समानता .... ६९
२३. उद्गीथाक्षरोंमें प्राणादिदृष्टि .... .... ७०
२४. उद्गीथाक्षरोंमें द्युलोकादि तथा सामवेदादि दृष्टि .... .... ७२
२५. सकामोपासनाका क्रम .... .... ७३
चतुर्थ खण्ड
२६ उद्गीथसंज्ञक ओंकारोपासनासे सम्बद्ध आख्यायिका .... .... ७७
२७. ओंकारका उपयोग और महत्त्व .... .... ८०
२८. ओंकारोपासनाका फल .... .... ८१
पञ्चम खण्ड
२९. ओंकार, उद्गीथ और आदित्यका अभेद .... .... ८३
३०. रश्मिदृष्टिसे आदित्यकी व्यस्तोपासनाका विधान और फल .... ८४
३१. मुख्य प्राणदृष्टिसे उद्गीथोपासना .... ... ८५
३२. प्राणभेददृष्टिसे मुख्य प्राणकी व्यस्तोपासनाका विधान और फल .... ८६
३३. प्रणव और उद्गीथका अभेद .... ... ८७
षष्ठ खण्ड
३४. अनेक प्रकार की आधिदैविक उद्गीथोपासनाएँ .... ... ८९
सप्तम खण्ड
३५. अध्यात्म-उद्गीथोपासना .... ... ९८
३६. आदित्यान्तर्गत और नेत्रान्तर्गत पुरुषोंकी एकता .... .... १००
३७. इनकी अभेददृष्टिसे उपासनाका फल .... ... १०३
अष्टम खण्ड
३८. उद्गीथोपासनाकी उत्कृष्टता प्रदर्शित करनेके लिये शिलक, दालभ्य और प्रवाहणका संवाद .... .... १०६
नवम खण्ड
३९. शिलककी उक्ति—आकाश ही सबका आश्रय है .... .... ११७
४०. आकाशसंज्ञक उद्गीथकी उत्कृष्टता और उसकी उपासनाका फल .... ११८
दशम खण्ड
४१. उषस्तिका आख्यान ... .... १२२
४२. राजयज्ञमें उषस्ति और ऋत्विजोंका संवाद ... .... १२८