भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 152, कुल 978 में से

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पृष्ठ 152
१४८छान्दोग्योपनिषद्[ अध्याय १

| लक्षणां साम्नां सामावयवस्तोभाक्षरविषयामुपनिषदं दर्शनं वेद तस्यैतद्यथोक्तं फलमित्यर्थः। द्विरभ्यासोऽध्यायपरिसमाप्त्यर्थः सामावयवविषयोपासनाविशेषपरिसमाप्त्यर्थो वेति ॥ ४ ॥ | इस उपर्युक्त लक्षणविशिष्ट सामको सामावयवभूत स्तोभाक्षरसम्बन्धिनी उपनिषद्को जानता है, उसे यह पूर्वोक्त फल मिलता है—ऐसा इसका तात्पर्य है। ‘उपनिषदं वेद उपनिषदं वेद’ यह पुनरुक्ति अध्यायकी समाप्ति सूचित करनेके लिये है। अथवा सामावयवविषयक उपासनाविशेषकी समाप्ति बतानेके लिये है ॥ ४ ॥ |


इतिच्छान्दोग्योपनिषदि प्रथमाध्याये
त्रयोदशखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥१३॥

—: ० :—

इति श्रीमद्गोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यपरमहंसपरिव्राजकाचार्य-
श्रीमच्छंकरभगवत्पादकृतौ छान्दोग्योपनिषद्विवरणे
प्रथमोऽध्यायः समाप्तः ॥ १ ॥

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