भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 153, कुल 978 में से

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पृष्ठ 153

द्वितीय अध्याय

प्रथम खण्ड

साधुदृष्टिसे समस्त सामोपासना

ओमित्येतदक्षरमित्यादिना सामावयवविषयमुपासनमनेकफलमुपदिष्टम् । अनन्तरं च स्तोभाक्षरविषयमुपासनमुक्तम् । सर्वथापि सामैकदेशसम्बद्धमेव तदिति । अथेदानीं समस्ते साम्नि समस्तसामविषयाण्युपासनानि वक्ष्यामीत्यारभते श्रुतिः । युक्तं ह्येकदेशोपासनानन्तरमेकदेशिविषयमुपासनमुच्यत इति ।[प्रथम अध्यायमें स्थित] 'ओमित्येतदक्षरम्' इत्यादि मन्त्रके द्वारा अनेक फल देनेवाली सामावयवसम्बन्धिनी उपासनाओंका उपदेश किया गया। उसके पश्चात् सामके अवयवभूत स्तोभाक्षरविषयिणी उपासनाका निरूपण हुआ। वह भी सर्वथा सामके एकदेशसे ही सम्बन्ध रखती है। इसके बाद अब मैं समस्त साममें होनेवाली अर्थात् समस्त सामसे सम्बन्ध रखनेवाली उपासनाओंका वर्णन करूँगी—इस आशयसे श्रुति आरम्भ करती है। एकदेश [अर्थात् अवयव] से सम्बन्ध रखनेवाली उपासनाके अनन्तर एकदेशी (अवयवी) से सम्बद्ध उपासनाका वर्णन किया जाता है—यह ठीक ही है।

ॐ समस्तस्य खलु साम्न उपासनꣳसाधु यत्खलु साधु तत्सामेत्याचक्षते यदसाधु तदसामेति ॥१॥

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