छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( १२ )
त्रयोविंश खण्ड
८१. तीन धर्मस्कन्ध .... ... २१४
८२. त्रयीविद्या और व्याहृतियोंकी उत्पत्ति .... .... २३०
८३. ओंकारकी उत्पत्ति ... .... २३१
चतुर्विंश खण्ड
८४. सवनोंके अधिकारी देवता .... .... २३३
८५. साम आदिको जाननेवाला ही यज्ञ कर सकता है .... ... २३४
८६. प्रातःसवनमें वसुदेवतासम्बन्धी सामगान .... .... २३५
८७. मध्याह्नसवनमें रुद्रसम्बन्धी सामगान ... ... २३८
८८. तृतीय सवनमें आदित्य और विश्वेदेवसम्बन्धी सामका गान ... २३९
तृतीय अध्याय
प्रथम खण्ड
८९. मधुविद्या .... .... २४२
९०. आदित्यादिमें मधु आदि दृष्टि .... .... २४३
९१. आदित्यकी पूर्वदिक्सम्बन्धिनी किरणोंमें मधुनाड्यादि दृष्टि .... २४४
द्वितीय खण्ड
९२. आदित्यकी दक्षिणदिक्सम्बन्धिनी किरणोंमें मधुनाड्यादि दृष्टि .... २४९
तृतीय खण्ड
९३. आदित्यकी पश्चिमदिक्सम्बन्धिनी किरणोंमें मधुनाड्यादि दृष्टि .... २५१
चतुर्थ खण्ड
९४. आदित्यकी उत्तरदिक्सम्बन्धिनी किरणोंमें मधुनाड्यादि दृष्टि ... २५२
पञ्चम खण्ड
९५. आदित्यकी ऊर्ध्वदिक्सम्बन्धिनी किरणोंमें मधुनाड्यादि दृष्टि ... २५४
षष्ठ खण्ड
९६. वसुओंके जीवनाश्रयभूत प्रथम अमृतकी उपासना .... ... २५७
सप्तम खण्ड
९७. रुद्रोंके जीवनाश्रयभूत द्वितीय अमृतकी उपासना .... .... २६२
अष्टम खण्ड
९८. आदित्योंके जीवनाश्रयभूत तृतीय अमृतकी उपासना .... .... २६४
नवम खण्ड
९९. मरुद्गणके जीवनाश्रयभूत चतुर्थ अमृतकी उपासना .... २६८
दशम खण्ड
१००. साध्योंके जीवनाश्रयभूत पञ्चम अमृतकी उपासना .... .... २७०