भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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( १३ )

एकादश खण्ड

१०१. भोग-क्षयके अनन्तर सबका उपसंहार हो जानेपर आदित्यरूप ब्रह्मकी स्वस्वरूपमें स्थिति .... २७२
१०२. ब्रह्मलोकके विषयमें विद्वान्‌का अनुभव .... २७३
१०३. मधुविद्याका फल .... २७४
१०४. सम्प्रदायपरम्परा .... २७५

द्वादश खण्ड

१०५. गायत्रीद्वारा ब्रह्मकी उपासना .... २७८
१०६. कार्यब्रह्म और शुद्धब्रह्मका भेद .... २८४
१०७. भूताकाश, देहाकाश और हृदयाकाशका अभेद .... २८५

त्रयोदश खण्ड

१०८. हृदयान्तर्गत पूर्वसुषिभूत प्राणकी उपासना .... २८९
१०९. हृदयान्तर्गत दक्षिणसुषिभूत व्यानकी उपासना .... २९१
११०. हृदयान्तर्गत पश्चिमसुषिभूत अपानकी उपासना .... २९३
१११. हृदयान्तर्गत उत्तरसुषिभूत समानकी उपासना .... २९४
११२. हृदयान्तर्गत ऊर्ध्वसुषिभूत उदानकी उपासना .... २९५
११३. उपर्युक्त प्राणादि द्वारपालोंकी उपासनाका फल .... २९६
११४. हृदयस्थित मुख्य ब्रह्मकी उपासना .... २९८
११५. हृदयस्थित परम ज्योतिका अनुमापक लिङ्ग .... २९९

चतुर्दश खण्ड

( शाण्डिल्यविद्या )
११६. सर्वदृष्टिसे ब्रह्मोपासना .... ३०३
११७. समग्र ब्रह्ममें आरोपित गुण .... ३०६
११८. ब्रह्म छोटे-से-छोटा और बड़े-से-बड़ा है .... ३११
११९. हृदयस्थित ब्रह्म और परब्रह्मकी एकता .... ३१२

पञ्चदश खण्ड

१२०. विराट्कोशोपासना .... ३१६

षोडश खण्ड

१२१. आत्मयज्ञोपासना .... ३२३

सप्तदश खण्ड

१२२. अक्षयादि फल देनेवाली आत्मयज्ञोपासना .... ३३०

अष्टादश खण्ड

१२३. मन आदि दृष्टिसे अध्यात्म और आधिदैविक ब्रह्मोपासना .... ३३८

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