छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 18, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ें( १४ )
एकोनविंश खण्ड
१२४. आदित्य और अण्डदृष्टिसे अध्यात्म एवं आधिदैविक उपासना... ३४४
चतुर्थ अध्याय
प्रथम खण्ड
१२५. राजा जानश्रुति और रैक्वका उपाख्यान .... .... ३५२
द्वितीय खण्ड
१२६. रैक्वके प्रति जानश्रुतिकी उपसत्ति .... .... ३६३
तृतीय खण्ड
१२७. रैक्वद्वारा संवर्गविद्याका उपदेश .... .... ३६९
१२८. संवर्गकी स्तुतिके लिये आख्यायिका ... .... ३७२
चतुर्थ खण्ड
१२९. सत्यकामका ब्रह्मचर्य-पालन और वनमें जाकर गौ चराना .... ३८०
पञ्चम खण्ड
१३०. वृषभद्वारा सत्यकामको ब्रह्मके प्रथम पादका उपदेश.... .... ३८६
षष्ठ खण्ड
१३१. अग्निद्वारा ब्रह्मके द्वितीय पादका उपदेश .... .... ३८९
सप्तम खण्ड
१३२. हंसद्वारा ब्रह्मके तृतीय पादका उपदेश .... .... ३९२
अष्टम खण्ड
१३३. मद्गुद्वारा ब्रह्मके चतुर्थ पादका उपदेश .... ... ३९४
नवम खण्ड
१३४. सत्यकामका आचार्यकुलमें पहुँचकर आचार्यद्वारा पुनः उपदेश ग्रहण करना .... .... ३९७
दशम खण्ड
१३५. उपकोसलके प्रति अग्निद्वारा ब्रह्मविद्याका उपदेश .... ... ४००
एकादश खण्ड
१३६. गार्हपत्याग्निविद्या ... ... ४०९
द्वादश खण्ड
१३७. अन्वाहार्यपचनाग्निविद्या .... ... ४१२