छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 163, कुल 978 में से
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तृतीय खण्ड
वृष्टिविषयक पाँच प्रकारकी सामोपासना
वृष्टौ पञ्चविधँसामोपासीतपुरोवातो हिंकारो मेघो जायते स प्रस्तावो वर्षति स उद्गीथो विद्योतते स्तनयतिं स प्रतिहारः ॥ १ ॥
वृष्टिमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। पूर्वीय वायु हिंकार है मेघ जो उत्पन्न होता है—वह प्रस्ताव है, जो बरसता है वह उद्गीथ है, जो चमकता और गर्जना करता है वह प्रतिहार है ॥ १ ॥
| भाष्यम् | भाषार्थ |
|---|---|
| वृष्टौ पञ्चविधं सामोपासीत;<br><br>लोकस्थितेर्वृष्टिनिमित्तत्वादानन्तर्यम् । पुरोवातो हिंकारः, पुरोवाताद्युद्ग्रहणान्ता हि वृष्टिः, यथा साम हिंकारादिनिधनान्तम्, अतः पुरोवातो हिंकारः प्राथम्यात् । मेघो जायते स प्रस्तावः, प्रावृषि मेघजनने वृष्टेः प्रस्ताव इति हि प्रसिद्धिः । वर्षति स उद्गीथः श्रेष्ठ्यात् । विद्योतते | वृष्टिमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे । लोकोंकी स्थिति वृष्टिके कारण होनेसे इसका लोक-सम्बन्धिनी उपासनाके अनन्तर निरूपण किया गया है । पूर्वीय वायु हिंकार है । पूर्वीय वायुसे लेकर जलग्रहणपर्यन्त वृष्टि कही जाती है, जिस प्रकार कि हिंकारसे लेकर निधनपर्यन्त साम कहा जाता है । अतः प्रथम होनेके कारण पूर्वीय वायु हिंकार है । मेघ जो उत्पन्न होता है वह प्रस्ताव है, वर्षा ऋतुमें मेघके उत्पन्न होनेपर ही वृष्टि प्रस्तुत होती है—यह प्रसिद्ध ही है। मेघ जो बरसता है वही श्रेष्ठताके कारण उद्गीथ है; तथा जो बिजली चमकती और |