छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ
पृष्ठ 170, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 170
<br>
| १६६ | छान्दोग्योपनिषद् | [अध्याय २ |
|---|
| फलम्— | इस उपासनाका फल— |
|---|
भवन्ति हास्य पशवः पशुमान्भवति य एतदेवं विद्वान्पशुषु पञ्चविधꣳसामोपास्ते ॥ २ ॥
जो इस प्रकार जाननेवाला पुरुष पशुओंमें पञ्चविध सामकी उपासना करता है उसे पशु प्राप्त होते हैं और वह पशुधनसे सम्पन्न होता है ॥२॥
| भवन्ति हास्य पशवः, पशुमान्भवति पशुफलैश्च भोग-त्यागादिभिर्युज्यत इत्यर्थः॥२॥ | उसे पशु प्राप्त होते हैं और वह पशुमान् होता है अर्थात् वह पशुओंसे प्राप्त होनेवाले फल-भोग एवं दानादिसे युक्त होता है ॥ २ ॥ |
|---|
इतिच्छान्दोग्योपनिषदि द्वितीयाध्याये षष्ठखण्डभाष्यं सम्पूर्णम् ॥ ६ ॥