भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 978 में से

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पृष्ठ 169

षष्ठ खण्ड

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पशुविषयक पाँच प्रकारकी सामोपासना

पशुषु पञ्चविधँसामोपासीताजा हिंकारोऽवयः प्रस्तावो गाव उद्गीथोऽश्वाः प्रतिहारः पुरुषो निधनम् ॥ १ ॥

पशुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। बकरे हिंकार हैं, भेड़ें प्रस्ताव हैं, गौएँ उद्गीथ हैं, अश्व प्रतिहार हैं और पुरुष निधन है ॥ १ ॥

पशुषु पञ्चविधं सामोपासीत । सम्यग्वृत्तेष्वृतुषु पशव्यः काल इत्यानन्तर्यम् । अजा हिंकारः, प्राधान्यात्प्राथम्याद्वा, "अजः पशूनां प्रथमः" इति श्रुतेः । अवयः प्रस्तावः, साहचर्यदर्शनादजावीनाम्, गाव उद्गीथः, श्रैष्ठ्यात् । अश्वाः प्रतिहारः, प्रतिहरणात्पुरुषाणाम् । पुरुषो निधनम्, पुरुषाश्रयत्वात्पशूनाम् ॥ १ ॥पशुओंमें पाँच प्रकारके सामकी उपासना करे। ऋतुओंके ठीक-ठीक बरतनेसे पशुओंके लिये अनुकूल समय रहता है इसलिये यह उपासना उसके पीछे कही गयी है। सबमें प्रधान होनेके कारण अथवा "पशुओंमें सर्वप्रथम बकरा है" इस श्रुतिके अनुसार सबसे पहले होनेके कारण बकरे हिंकार हैं। बकरे और भेड़ोंका साहचर्य देखा जानेसे भेड़ें प्रस्ताव हैं। सर्वश्रेष्ठ होनेके कारण गौएँ उद्गीथ हैं। पुरुषोंका प्रतिहरण (वहन) करनेके कारण घोड़े प्रतिहार हैं तथा पशुवर्ग पुरुषके आश्रित हैं, अतः पुरुष निधन है ॥ १ ॥

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