छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 200, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंषोडश खण्ड
वैराजसामकी उपासना
वसन्तो हिंकारो ग्रीष्मः प्रस्तावो वर्षा उद्गीथः शरत्प्रतिहारो हेमन्तो निधनमेतद्वैराजमृतुषु प्रोतम् ॥ १ ॥
वसन्त हिंकार है, ग्रीष्म प्रस्ताव है, वर्षा उद्गीथ है, शरद् ऋतु प्रतिहार है, हेमन्त निधन है—यह वैराज साम ऋतुओंमें अनुस्यूत है ॥ १ ॥
| वसन्तो हिंकारः प्राथम्यात् । ग्रीष्मः प्रस्ताव इत्यादि पूर्ववत् ॥ १ ॥ | सर्वप्रथम होनेके कारण वसन्त हिंकार है, ग्रीष्म प्रस्ताव है इत्यादि अर्थ पूर्ववत् समझना चाहिये ॥ १ ॥ |
स य एवमेतद्वैराजमृतुषु प्रोतं वेद विराजति प्रजया पशुभिर्ब्रह्मवर्चसेन सर्वमायुरेति ज्योग्जीवति महान्प्रजया पशुभिर्भवति महान्कीर्त्यार्तून्न निन्देत्तद्व्रतम् ॥ २ ॥
वह पुरुष, जो इस प्रकार इस वैराज सामको ऋतुओंमें अनुस्यूत जानता है, प्रजा पशु और ब्रह्मतेजके कारण शोभित होता है, वह