भारतकोश
छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)

Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya

आदि शङ्कराचार्य द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished978 पृष्ठ

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द्वितीय खण्ड २४५. दहर-ब्रह्मकी उपासनाका फल ... ... ८२१

तृतीय खण्ड २४६. असत्यसे आवृत्त सत्यकी उपासना और नामाक्षरोपासना .... ८२६

चतुर्थ खण्ड २४७. सेतुरूप आत्माकी उपासना .... ... ८३६

पञ्चम खण्ड २४८. यज्ञादिमें ब्रह्मचर्यादिदृष्टि .... .... ८४२

षष्ठ खण्ड २४९. हृदयनाडी और सूर्यरश्मिरूप मार्गकी उपासना ... .... ८५४

सप्तम खण्ड २५०. आत्मतत्त्वका अनुसंधान करनेके लिये इन्द्र और विरोचनका प्रजापतिके पास जाना ... .... ८६५

अष्टम खण्ड २५१. इन्द्र तथा विरोचनका जलके शिकोरेमें अपना प्रतिबिम्ब देखना .... ८७६

नवम खण्ड २५२. इन्द्रका पुनः प्रजापतिके पास आना ... ... ८८७

दशम खण्ड २५३. इन्द्रके प्रति स्वप्नपुरुषका उपदेश ... .... ८९४

एकादश खण्ड २५४. सुषुप्त पुरुषका उपदेश ... .... ९०१

द्वादश खण्ड २५५. मर्त्यशरीर आदिका उपदेश .... ... ९०६

त्रयोदश खण्ड २५६. ‘श्यामाच्छबलम्’ इस मन्त्रका उपदेश ... .... ९३७

चतुर्दश खण्ड २५७. कारणरूपसे आकाशसंज्ञक ब्रह्मका उपदेश ... ... ९३९

पञ्चदश खण्ड २५८. आत्मज्ञानकी परम्परा, नियम और फलका वर्णन ... ... ९४३