छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 24, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ें( २० )
त्रयोदश खण्ड
२२९. आकाशकी अपेक्षा स्मरणका महत्त्व .... ... ७६१
चतुर्दश खण्ड
२३०. स्मरणसे आशाकी महत्ता .... ... ७६४
पञ्चदश खण्ड
२३१. आशासे प्राणका प्राधान्य .... ... ७६७
षोडश खण्ड
२३२. सत्य ही जानने योग्य है .... ... ७७४
सप्तदश खण्ड
२३३. विज्ञान ही जानने योग्य है ... ... ७७६
अष्टादश खण्ड
२३४. मति ही जानने योग्य है .... .... ७७९
एकोनविंश खण्ड
२३५. श्रद्धा ही जानने योग्य है .... ..- ७८०
विंश खण्ड
२३६. निष्ठा ही जानने योग्य है .... .... ७८१
एकविंश खण्ड
२३७. कृति ही जानने योग्य है ... .... ७८२
द्वाविंश खण्ड
२३८. सुख ही जानने योग्य है .... ... ७८३
त्रयोविंश खण्ड
२३९. भूमा ही जानने योग्य है ... .... ७८५
चतुर्विंश खण्ड
२४०. भूमाके स्वरूपका प्रतिपादन ... .... ७८६
पञ्चविंश खण्ड
२४१. सर्वत्र भूमा ही है .... ... ७९३
षड्विंश खण्ड
२४२. इस प्रकार जाननेवालेके लिये फलका उपदेश .... ... ७९८
अष्टम अध्याय
प्रथम खण्ड
२४३. दहर-पुण्डरीकमें ब्रह्मकी उपासना ... .... ८०३
२४४. पुण्यकर्मफलोंका अनित्यत्व .... .... ८१९