छान्दोग्योपनिषद् (शाङ्करभाष्य सहित)
Chandogya Upanishad with Shankara Bhashya
आदि शङ्कराचार्य द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 29, कुल 978 में से
संदर्भ में पढ़ेंॐ
तत्सद्ब्रह्मणे नमः
छान्दोग्योपनिषद्
मन्त्रार्थ, शाङ्करभाष्य और भाष्यार्थसहित
सच्चिदानन्दसान्द्राय सर्वातीताय साक्षिणे ।
नमः श्रीदेशिकेन्द्राय शिवायाशिवघातिने ॥
शान्तिपाठ
ॐ आप्यायन्तु ममाङ्गानि वाक्प्राणश्चक्षुः श्रोत्रमथो बलमिन्द्रियाणि च सर्वाणि । सर्वं ब्रह्मोपनिषदं माहं ब्रह्म निराकुर्यां मा मा ब्रह्म निराकरोदनिराकरणमस्त्वनिराकरणं मेऽस्तु । तदात्मनि निरते य उपनिषत्सु धर्मास्ते मयि सन्तु ते मयि सन्तु ॥
ॐ शान्तिः ! शान्तिः !! शान्तिः !!!
मेरे [हाथ-पाँव आदि] अङ्ग सब प्रकारसे पुष्ट हों, वाणी, प्राण, नेत्र और श्रोत्र पुष्ट हों तथा सम्पूर्ण इन्द्रियाँ बल प्राप्त करें । उपनिषदमें प्रतिपादित ब्रह्म ही सब कुछ है । मैं ब्रह्मका निराकरण (त्याग) न करूँ और ब्रह्म मेरा निराकरण न करे। इस प्रकार हमारा अनिराकरण (निरन्तर मिलन) हो, अनिराकरण हो । उपनिषदोंमें जो शम आदि धर्म कहे गये हैं वे ब्रह्मरूप आत्मामें निरन्तर रमण करनेवाले मुझमें सदा बने रहें, वे मुझमें सदा बने रहें । आध्यात्मिक, आधिभौतिक और आधिदैविक तापकी शान्ति हो ।